1. जनपथ न्यूज डेस्क

Reported by: गौतम सुमन गर्जना, भागलपुर
12 अगस्त 2022

भागलपुर : बिहार में भाजपा का साथ छोड़कर लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली राजद के साथ नीतीश कुमार की सरकार बनाने के बाद देश के विपक्षी दलों में अगले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को संयुक्त रुप से विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर न केवल मंथन होने लगा है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में इस भ्रामक खबरों के लिये बड़े सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। बिहार के नवनियुक्त डिप्टी सीएम और लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव ने भी कहा है कि जब नरेंद्र मोदी पीएम हो सकते हैं तो फिर नीतीश कुमार क्यों नहीं..? विदित हो कि बिहार में 2025 में विधानसभा के चुनाव होने हैं, जबकि लोकसभा का चुनाव वर्ष 2024 में होना है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश में सपा प्रमुख अखिलेश यादव आदि भी नीतीश कुमार को पीएम उम्मीदवार बनाने के पक्ष में दिख रहे हैं। नीतीश कुमार कई बार केंद्र में मंत्री और पिछले 17 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ इसलिए छोड़ा है ताकि वे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में संयुक्त विपक्ष की ओर से पीएम के उम्मीदवार हो सकें। अब यहां पर सवाल यह उठता है कि यदि नीतीश कुमार पीएम पद के उम्मीदवार होंगे, तो फिर कांग्रेस के राहुल गांधी का क्या होगा..? मौजूदा समय में कांग्रेस के कार्यकर्तान
गण राहुल गांधी को ही भावी प्रधानमंत्री मानते रहे हैं और
कई अवसरों पर राहुल गांधी ने भी विपक्ष के नेताओं को एकजुट कर संयुक्त विपक्ष के नेता होने का प्रदर्शन भी किया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी भी चाहती हैं कि उनका पुत्र राहुल गांधी एक दिन अपने देश का प्रधानमंत्री बनें। राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस शासित राजस्थान व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भूपेश बघेल पूरा जोर लगा रहे हैं। यह सही है कि विपक्ष का सहयोग मिलने पर ही राहुल गांधी पीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं, यानि देश के सभी गैर भाजपाई राजनीतिक दल यह तय करें कि विपक्ष को बहुमत मिलने पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री होंगे, तभी राहुल गांधी पीएम बन सकते हैं। सवाल उठ रहा है कि जब नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता का नाम पीएम उम्मीदवार के लिए विपक्ष की ओर से चलाया जा रहा है, तब राहुल गांधी का नाम कैसे चलेगा? इस पर कांग्रेस के नेताओं को मंथन करने की जरूरत है। लोकसभा में मौजूदा समय में 545 में से कांग्रेस के मात्र 52 सांसद हैं, जबकि अन्य विपक्षी दलों के सांसदों की संख्या कांग्रेस से बहुत ज्यादा है। सवाल यह भी है कि राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए क्या विपक्ष के नेता उन्हें पीएम उम्मीदवार स्वीकार करेंगे..?

राहुल गांधी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में से कांग्रेस का सफाया हो चुका है। 400 विधायकों वाले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के मात्र 3 विधायक ही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में तो कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है।

4 Views