भोजपुर में बेटियों ने निभाया बेटों का फर्ज, मां की अर्थी को कंधा देकर किया अंतिम संस्कार

Edited By: राकेश कुमार
जनपथ न्यूज/सितंबर 15, 2021

लड़कियां अब हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही है और कई क्षेत्र में लडको से आगे भी है। अगर उन्‍हें समान अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में बेटों की तरह ही कामयाब हो सकती है या उनसे आगे भी निकल सकती है। बेटियां परिवार की हर मुश्किल घड़ी में अपनों के साथ खड़ी रहती हैं।

ऐसा ही एक वाक्या आरा जिले के गड़हनी प्रखंड अन्तर्गत सुअरी गांव का है। जहां समाजिक परंपराओं को तोड़कर एक नई परंपरा बनाने की बेटियों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और अपनी मां की शव यात्रा में बेटों की भूमिका निभाई। बेटियों ने मां की मृत देह को सजाकर अंतिम यात्रा के लिए तैयार किया और मां को कंधे पर उठाकर श्मसान घाट तक पहुंचाया। आगे-आगे दोनों बेटियां अर्थी को कंधा देकर चली रही थी और पीछे-पीछे गांव-समाज के लोग, नजारा देखने लायक था। मृतका पुष्‍पा देवी भाकपा-माले के जिला सचिव जवाहर लाल सिंह की पत्नी और पार्टी की सदस्य थीं। उनका अंतिम संस्कार बड़हरा के महुली घाट पर बड़ी संख्या में उपस्थित माले नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आपको बताते चलें कि पुष्पा देवी को कुल तीन बेटियां ही हैं। एक बेटी बैंक में है। दूसरी बेटी का चयन दारोगा में हुआ है।

दिवंगत मां पुष्पा देवी के अर्थी को कंधा उनकी बेटियाें रिंकी कुमारी और झिंकी कुमारी ने दिया। पार्टी की परंपरा के अनुसार उन्हें पार्टी का झंडा उनके पार्थिव शरीर पर समर्पित किया गया।

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