जनपथ न्यूज़ पटना. शुक्रवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के ट्विटर हैंडल से एक पत्र पोस्ट किया गया। पत्र पटना जिले के मोकामा प्रखंड कार्यालय द्वारा जारी किया गया था। इसमें बीडीओ ने तीन स्कूलों को पत्र लिखकर एनआरसी को लेकर डाटा संग्रहण के लिए शिक्षकों की सूची मांगी थी। जब पत्र को लेकर बवाल मचा तब बीडीओ सतीश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि गलत टाईपिंग की वजह से कन्फ्यूजन हुआ है। एनपीआर की जगह एनआरसी टाइप हो गया। एनपीआर के लिए डाटा संग्रहण किया जाना है और इसका एनआरसी से कोई मतलब नहीं है। बता दें कि यह पत्र 29 जनवरी को लिखा गया था।
लालू ने ट्वीट कर नीतीश पर उठाए सवाल
पत्र को लेकर लालू ने ट्वीट कर नीतीश पर सवाल उठाए। लालू ने ट्वीट कर लिखा कि इस वक्त कोई भी अधिकारी एनआरसी को लेकर बात करने से बच रहा है। लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो खुद को समाजवादी और गांधीवादी नेता बताते हैं, उन्होंने एनआरसी की प्रक्रिया को शुरू करने का आदेश दे दिया है। ऐसे सांप्रदायिक नेताओं का छलावा देखिये।


इसी पत्र के संबंध में तेजस्वी ने भी ट्वीट कर नीतीश पर हमला बोला। तेजस्वी ने ट्वीट में लिखा कि नीतीश कुमार का सफेद झूठ पकड़ा गया। बिहार में एनआरसी और एनपीआर का काम शुरू हो चुका है। अधिकारी की चिट्ठी से राज खुल गया है। अभी एनपीआर का काम किसी भी प्रदेश में शुरू नहीं हुआ है, लेकिन बिहार में एनआरसी की प्रक्रिया नीतीश ने शुरू कर दी।


बिहार में किसी भी हाल में नहीं लागू होगा एनआरसी: नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही साफ कर चुके हैं बिहार में किसी भी हाल में एनआरसी लागू नहीं करेंगे। नीतीश कुमार का कहना है कि एनपीआर पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की जरूरत है। एनपीआर में माता-पिता की जन्म तिथि और जन्मस्थान पूछना व्यवहारिक नहीं है। बहुत लोगों को खासकर गरीबों को माता-पिता का डेट ऑफ बर्थ पता नहीं है।

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