नीतीश सरकार की “हर घर नल का जल योजना में डिप्टी सीएम की बहू और साला बन गए ठेकेदार, मिला 53 करोड़ का ठेका

Edited By: राकेश कुमार
जनपथ न्यूज/सितंबर 24, 2021

बिहार में नीतीश कुमार की हर घर नल का जल योजना से गरीबों को पीने का पानी मिला या नहीं ये कहना मुश्किल है लेकिन राजनेताओं के घर जरूर भर गये। नल-जल योजना में भ्रष्टाचार की चारो ओर से मिल रही शिकायतों के बीच सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के परिजनों को इस योजना में 53 करोड़ का ठेका मिला। तारकिशोर प्रसाद की बहू तक नल-जल योजन की ठेकेदार बन गयीं, जिन्हें पहले से ऐसा काम करने का कोई अनुभव नहीं था। नल-जल योजन को लेकर ये सनसनीखेज खुलासा एक अंग्रेजी अखबार ने किया है। अग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने कटिहार जिले में नल-जल योजना के ठेकेदारों की गहन पडताल की औऱ उसमें ये बातें सामने आयी हैं। गौरतलब है कि बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद कटिहार से ही विधायक हैं। वे कटिहार से लगातार चौथी बार विधायक चुने गये हैं।

अग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि ये रिपोर्ट बिहार के 20 जिलों में संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल और उनके रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और बिहार के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग पीएचईडी के रिकॉर्ड के मिलान के बाद लिखी गयी है। अखबार ने दावा किया है कि जहां राजनीतिक संबंधों के आधार पर ठेके दिए गए थे, वहां पर काम कर रहे कई ठेकेदारों और इस योजना के लाभार्थियों से बातचीत कर मामले के सच का पता लगाया गया।

द इंडियन एक्सप्रेस अखबार के पडताल के मुताबिक साल 2019-20 में बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानि पीएचईडी ने कटिहार जिले में नल-जल योजना के 36 प्रोजेक्ट को मौजूदा डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के परिजनों को सौंप दिये। नल-जल योजना के तहत कटिहार में जिन ठेकेदारों को काम मिला उनमें तारकिशोर प्रसाद की बहू पूजा कुमारी, तारकिशोर प्रसाद के साले प्रदीप कुमार भगत और डिप्टी सीएम के करीबी प्रशांत चंद्र जायसवाल, ललित किशोर प्रसाद और संतोष कुमार शामिल हैं। बिहार सरकार के पीएचईडी विभाग ने नल जल योजना के ठेके बांटने में दिलचस्प खेल खेला। कटिहार जिले में भवडा पंचायत हैं, इसमें 13 वार्ड हैं। सारे वार्ड का काम तारकिशोर प्रसाद के परिजनों को सौंप दिया गया। कुछ वार्डों का काम तारकिशोर प्रसाद की बहू पूजा कुमारी को सौंपा गया तो बाकी का काम उनके साले प्रदीप कुमार भगत से जुड़ी कंपनियों को। गांव में मौजूद लोग बताते हैं कि पूजा कुमारी कभी साइट पर नहीं आय़ीं। उन्हें जो ठेका मिला था उसका काम भी प्रदीप कुमार भगत ने ही करवाया। हालांकि तारकिशोर प्रसाद ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को दी गयी अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इन ठेकों में कोई गडबड़ी नहीं की गयी है। तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि ये ठेके तब दिये गये थे जब वे विधायक थे। तारकिशोर प्रसाद ये मान रहे हैं कि उनकी बहू को ठेका मिला लेकिन अपने साले प्रदीप कुमार भगत से जुडी कंपनियों से कोई भी वास्ता होने से इंकार कर दिया।

इधर इस मामले को लेकर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने बिहार के पीएचईडी मंत्री रामप्रीत पासवान ने डिप्टी सीएम के परिजनों को मिले ठेके के बारे में पूछताछ की। रामप्रीत पासवान ने कहा कि उन्हें तारकिशोर प्रसाद के सगे संबंधियों को ठेका मिलने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि नल-जल योजना के बारे में शिकायत है तो लोगों को सरकार को बताना चाहिये। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के परिजनों को दिये गये जिन ठेकों की बात की जा रही है वे उस वक्त दिये गये जब कोई और इस विभाग का मंत्री था।

पीएचईडी के सचिव जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नल-जल योजना का ठेका देने में नियमों का पालन किया जाता है। जो भी कंपनी सबसे कम पैसे में काम पूरा करने का बिड डालती है उसे काम दे दिया जाता है। जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें ठेकों को देने में राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जायेगी।

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