जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
19 मार्च 2023

भागलपुर : सीमांचल में एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी के पहुंचने के साथ ही सियासी सरगर्मी बढ़ गयी है। ओवैसी दो दिनों तक सीमांचल के मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज के अलग-अलग क्षेत्रों में सभाएं करेंगे। इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और महागठबंधन के नेता भी इस इलाके में सभाएं कर चुके हैं। मुस्लिम बहुल होने के कारण महागठबंधन को अपना बड़ा वोट बैंक सीमांचल में दिखता है। इसलिए कि महागठबंधन के बड़े घटक आरजेडी के एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के एक हिस्से मुस्लिम यहां अधिक प्रभावकारी हैं। कहने को तो यह 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी है, लेकिन वास्तव में महागठबंधन और एनडीए सीमांचल में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारी भी अभी से ही लग गए हैं। अब तो ओवैसी ने एंट्री मार ली है। ओवैसी का आना महागठबंधन के लिए जहां खतरे की घंटी है, वहीं बीजेपी खेमे में इससे खुशी की लहर है।

*महागठबंधन से मुस्लिम वोट दरकाएंगे ओवैसी*

सीमांचल में एआईएमआईएम के जनाधार का पहली बार पता तब चला, जब 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में इसके 5 एमएलए चुने गये थे। हालांकि दुर्भाग्य यह रहा कि उनमें 4 बाद में पाला बदल कर आरजेडी का हिस्सा बन गये। ओवैसी इस बात से भी आरजेडी के प्रति बेहद गुस्से में हैं। वे इसका बदला लेने की नीयत से ही सीमांचल में अपनी सक्रियता फिर से बढ़ाने पहुंचे हैं। अर्से तक मुस्लिम आरजेडी के समर्थक रहे। नीतीश के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी तो मुस्लिमों का रुझान जेडीयू की तरफ बढ़ा। आरजेडी के आधार वोट को नीतीश ने अपने पाले में कर लिया। इसके लिए नीतीश ने बड़े कायदे से काम किये। सबसे पहले पिछड़े मुसलमानों की पसमांदा श्रेणी बना कर उन्होंने उनको अपनी ओर आकर्षित किया। बाद में वे अपने कुछ और कामों से मुसलमानों में लोकप्रिय होते गये। आरजेडी के समीकरण का एम (मुस्लिम) अब नीतीश का बन चुका है।

*बीजेपी से पंगा लेकर नीतीश ने भरोसा जीता*

अतीत में बिहार की सियासत में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिससे मुसलमानों का नीतीश पर भरोसा बढ़ा। पहली घटना तब की है,जब गुजरात का सीएम रहते नरेंद्र मोदी ने बिहार में बाढ़ राहत के लिए मदद भेजी। नीतीश ने मदद लेने से इनकार कर दिया। मदद का चेक वापस नरेंद्र मोदी के पास पहुंच गया। नीतीश ने अपने इस आचरण से यह दर्शाने की कोशिश की कि गुजरात दंगे के आरोपी सीएम से वह मदद नहीं ले सकते। इतना ही नहीं, वे बीजेपी के साथ रहते हुए भी उसके स्टार प्रचारक के रूप में नरेंद्र मोदी को बिहार आने से रोकते रहे। हद तो तब हो गई, जब उन्होंने बीजेपी द्वारा नरेंद्र मोदी को पीएम कैंडिडेट घोषित करते ही बीजेपी से कुट्टी कर ली। 2014 का लोकसभा चुनाव नीतीश की पार्टी जेडीयू ने पहली बार अलग लड़ा। फिर 2015 में आरजेडी और कांग्रेस के साथ बने महागठबंधन का हिस्सा जेडीयू बन गया। नरेंद्र मोदी से नीतीश की नफरत ऐसी रही कि एक बार पटना आने पर उन्होंने पहले से दिये भोज को अचानक रद्द कर दिया था। सीएए और एनआरसी के मसले पर भी नीतीश ने अपने विरोध के जरिये स्टैंड क्लीयर कर दिया। इन्हीं वजहों से आरजेडी से सटे मुसलमान नीतीश की पार्टी जेडीयू में अधिक अपनत्व देखने लगे।

*ओवैसी के आने से बीजेपी को फायदा होगा*

बिहार के मुस्लिम बहुल इलाके ओवैसी को सूट करते हैं। यही वजह है कि 2020 में उन्होंने सीमांचल से अपने उम्मीदवार उतारने का पहला प्रयोग किया। इसमें उन्हें अप्रत्याशित कामयाबी भी मिली। बाद में विधान सभा का की दो सीटों- कुढ़नी और गोपालगंज के लिए हुए उपचुनावों में भी ओवैसी के उम्मीदवारों का असर दिखा। गोपालगंज में अगर ओवैसी के उम्मीदवार ने वोट नहीं काटे होते तो आरजेडी के उम्मीदवार का जीतना तय था। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि ओवैसी की पार्टी अगर चुनाव मैदान में उतरती है तो उसके उम्मीदवार भले न जीतें, पर महागठबंधन के कैंडिडेट के जीतने में बाधा तो बन ही सकते हैं। बीजेपी तो यही चाहती भी है। महागठबंधन के वोट कट जाएं और हिन्दुत्व के नाम पर हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण बीजेपी की सफलता के लिए आवश्यक हैं।

*क्या है ओवैसी के सीमांचल दौरे में तैयारी*

एआईएमआईएम की योजना के मुताबिक असदुद्दीन ओवैसी कल 18 मार्च की तरह आज 19 मार्च को भी सीमांचल के कई विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं करेंगे। उनके इस दौरे को लेकर एआईएमआईएम समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है। ओवैसी पहले दिन पूर्णिया के बायसी और डगरुआ में कार्यकर्ता सम्मेलन किये। इस दौरान अमौर प्रखंड के खाड़ी घाट में भी उनकी जनसभा रखी गयी थी। वहीं देर शाम वे कोचाधामन प्रखंड के भट्टा हाट में सभा को संबोधित कर रहे थे। आज रविवार को ओवैसी बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर कार्यकर्ता सम्मेलन करेंगे। पोठिया प्रखंड के भेड़भेरी से खरखड़ी घाट तक पद यात्रा भी करेंगे। स्थानीय मुद्दों को लेकर पार्टी ने 11 सूत्री मांग पत्र तैयार किया है। इसी मांग पत्र के साथ ओवैसी जनता के बीच जाएंगे। उनका फोकस उन विधानसभा क्षेत्रों पर अधिक है, जहां से उनके उम्मीदवार जीते थे।
इस बावत एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान का कहना है कि उनके विधायकों को आरजेडी ने अपने पाले में कर लिया। उसका हिसाब लोकसभा चुनाव में पार्टी जरूर लेगी।

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