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103 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी फूलमती देवी का निधन: पूरे बिहटा क्षेत्र में शोक की लहर

पति के निधन के दो माह बाद ली अंतिम सांस; वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

बिहटा (संवाद सूत्र): बिहटा प्रखंड के दिलावरपुर गांव निवासी महान स्वतंत्रता सेनानी स्व. जगदीश सिंह की 103 वर्षीय धर्मपत्नी फूलमती देवी का सोमवार की शाम आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

गौरतलब है कि महान स्वतंत्रता सेनानी स्व. जगदीश सिंह का निधन दो माह पूर्व 27 अगस्त को हुआ था। बताया जा रहा है कि पति के वियोग के सदमे को फूलमती देवी सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

घटना की सूचना मिलते ही बिहटा के अंचलाधिकारी (CO) राकेश कुमार सिंह शोकाकुल परिवार के आवास पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।

शोकाकुल परिवार: स्व. फूलमती देवी अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं:

  • पुत्र: सुदर्शन सिंह, अशोक सिंह

  • पौत्र: मुकेश सिंह, संजय सिंह, विवेक कुमार, मन्नू कुमार, छोटे कुमार

  • पुत्रवधु: राम दुलारी देवी, मीना देवी

  • पौत्रवधु: पम्मी कुमारी, रूबी कुमारी

  • परपोता: माधव कुमार, तनिक कुमार

1942 की वो खौफनाक याद: जब तलवार लेकर अंग्रेजों से भिड़ गई थीं फूलमती देवी

अपने जीवनकाल में अंग्रेजों के अत्याचारों को याद करते हुए फूलमती देवी अक्सर 1942 की क्रांति का वो किस्सा साझा करती थीं।

“पुलिस की लाठियों और राइफल के कुंदों के जख्म दशकों बाद भी शरीर में टीस मारते हैं।” — स्व. फूलमती देवी

उन्होंने बताया था कि सन 1942 में अंग्रेज सिपाही उनके घर में घुसकर उनके पति को खोजते हुए गाली-गलौज कर रहे थे। पति को बचाने और अपना स्वाभिमान बनाए रखने के लिए वे घर में रखी तलवार उठाकर फिरंगियों के पीछे दौड़ पड़ी थीं। अंग्रेजों ने उनसे तलवार छीन ली और राइफल के बट से हमला कर उनका हाथ तोड़ दिया। उस समय घर में किसी पुरुष के न होने के कारण उन्होंने खुद ही चोट पर हल्दी-सजी का लेप लगाया, बांस की कपाची बांधी और सूती कपड़े से बांधकर अपना घरेलू उपचार किया था।

मंगलवार को निकलेगी अंतिम यात्रा

स्व. फूलमती देवी की अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह उनके पैतृक गांव दिलावरपुर से प्रस्थान करेगी। इसके बाद वाराणसी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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