जनपथ न्यूज डेस्क

Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
19 अक्टूबर 2022

भागलपुर : जिले में गंगा के जलस्तर में लगातार तेजी से बृद्धि हो रही है। गंगा खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है। जलस्तर में अभी और वृद्धि की संभावना है. गंगा का दियारा इलाका, चौर जलमग्न हो चुका है। गांव के तरफ तेजी से पानी का फैलाव होने लगा है। इन सब के बीच सबौर प्रखंड के रजंदीपुर से एक ऐसी तस्वीर समाने आई है। जिसे देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। दरअसल, यहां एक छोटी से नाव पर लगभग 30-40 नौनिहालों को लेकर शिक्षक प्रतिदिन स्कूल लेकर जा रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी तरह कि अनहोनी हुई, तो इसका जिम्मेवार कौन होगा…???

छोटी नाव पर नौनिहालों की जिंदगी : मामला सबौर प्रखंड के रजंदीपुर की है। यहां बीते 11 दिनों से छोटे-छोटे बच्चों को शिक्षक छोटी सी नाव पर बिठाकर, उन्हें स्कूल लेकर जा रहे हैं। इस मामले को लेकर स्कूल के प्राचार्य ने कहा कि अभी बच्चों को अर्धवार्षिक मूल्यांकन कार्य चल रहा है। उन्होंने वरीय अधिकारियों को सूचना दे दी है। वहीं, स्कूल की शिक्षिका ने कहा कि बच्चों को इस तरह से नाव पर बैठाकर वे लगभग एक किमी दूर जाती है। डर तो है, खतरा भी बना हुआ है, लेकिन करें तो क्या करें, अभी बच्चों का मूल्यांकन कार्य जारी है।

नौनिहालों के परिजन बोले : वहीं, इस मामले पर नौनिहालों के परिजनों ने कहा कि हम तो अपने बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेज रहे हैं। स्कूल के शिक्षकों ने उनको आश्वस्त किया है। जिसके बाद वे अपने बच्चे को स्कूल के शिक्षकों के साथ भेज रहे हैं। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए। सरकार वैकल्पिक व्यवस्था करे। वहीं, नाव पर सवार होकर स्कूल जा रहे बच्चों ने बताया कि उन्हें नाव पर बैठने में डर तो लगता है, लेकिन अभी परीक्षा का समय है। अगर शिक्षा हासिल करनी है तो डर के नौके पर सवार होकर पानी को तो पार करना ही पड़ेगा।

एक दशक बाद देखने को मिल रहा ऐसा नजारा : गौरतलब है कि दशहरे के पहले से हो रही बारिश के बाद गंगा का जलस्तर दोगुनी रफ्तार के साथ बढ़ा है। भागलपुर के दियारा इलाके में गंगा का विस्तार और कटान लगातार जारी है। गंगा का दियारा और चौर इलाका जलमग्न हो चुका है। गांव के तरफ तेजी से पानी का फैलाव होने लगा है। करीब एक दर्जन गांव बाढ़ से घिरे हैं। इन सब के बीच नाव पर सवार होकर स्कूल जा रहे नौनिहालों की जो तस्वीर सामने आई है वह कथित विकास के मुंह पर एक तमाचा है। बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी तरह की अनहोनी हो गयी. तो इसका जिम्मेवार कौन होगा..जिला प्रशासन, स्कूल प्रबंधन या फिर बिहार सरकार..?

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