जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
13 जनवरी 2023

भागलपुर : बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ये क्या कह गये ! उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कहा- रामचरित मानस, मनुस्मृति और गोलवरकर की किताब नफरत फैलाने वाले ग्रंथ हैं। रामचरित मानस के पात्र राम के बारे में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माझी ने भी कभी ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने रामचरित मानस को काल्पनिक कथाओं की किताब कहा था। चंद्रशेखर यादव उनसे एक कदम आगे बढ़ गये। उन्होंने रामचरित मानस सहित तीन ग्रंथों के नाम नफरती किताबों के रूप में गिना दिये। उनका बयान राजनीतिक तौर पर क्या असर डालेगा, यह तो समय के गर्भ में है, लेकिन इतना तो तय है कि हिन्दुओं की आस्था पर उन्होंने कड़ा प्रहार किया है। सवाल उठता है कि पर हित सरिस धरम नहि भाई (दूसरे की भलाई जैसा धर्म कोई नहीं है) की सीख देने वाले रामचरित मानस को नफरती कहना कितना उचित है।

आखिर क्या कहा शिक्षा मंत्री ने* : शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि नफरत देश को महान राष्ट्र नहीं बना सकती है। प्रेम से ही देश महान बनेगा। मनुस्मृति नफरत फैलाती है। मनुस्मृति में 85 प्रतिशत लोगों को गाली दी गयी है। इसीलिए अतीत में इसे जलाया गया है। रामचरित मानस में कहा गया है कि निचली जातियों के लोगों को शिक्षा का अधिकार नहीं है। निचली जाति के लोग शिक्षा पाकर सांप के समान जहरीले हो जाते हैं। दूध पीने के बाद उनका जहर और बढ़ जाता है। बाबा भीमराव अंबेडकर के हवाले से चंद्रशेखर ने कहा कि ये पुस्तकें नफरत फैलाती हैं। पहले युग में मनुस्मृति ने यह काम किया, दूसरे युग में रामचरित मानस और तीसरे युग में गोलवरकर के बंच आफ थाट्स ने नफरत फैलाने का काम किया।

राम का चरित्र समन्वयकारी : चंद्रशेखर के बयान पर रामचरित मानस के अध्येता अयोध्या नाथ मिश्र का कहना है कि राम का चरित्र बाल्यकाल से ही समन्वयकारी रहा है। ऐसे में उनके चरित्र को व्याखायित करने वाला ग्रंथ नफरती कैसे हो सकता है। राम वन गमन का पूरा कालखंड दलितों के उत्थान में राम के योगदान का था। उनके साथ समन्वय का वह काल था। राम के वनवास का 14 वर्षों का काल तो पूरी तरह दलितोत्थान का ही काल माना जाता है। लंका पर हमले के लिए राम की सेना में तब दलितों के प्रतीक माने जाने वाले गिद्ध, वानर, रीछ ही थे। राम-लक्ष्मण के अलावा कोई मानव सेना में नहीं था। वन गमन के लिए निकले राम और केवट के संवाद से ही स्पष्ट हो जाता है कि दलित-सवर्ण जैसा भाव राम के मन में कहीं नहीं था। सबरी प्रसंग भी दलितों के साथ समन्वय पर ही आधारित है। प्रेमवश दलित समुदाय की सबरी ने जूठे बेर राम को खिलाये थे। राम ने भी हंसते-हंसते फल ग्रहण किया था। जब राम समन्वयकारी आचरण-स्वभाव के थे तो उन पर आधारित रामचरित मानस कैसे नफरती हो सकता है।

जीतन राम माझी राम पर उठाते रहे हैं सवाल : बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम माझी भी रामायण पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने तो स्पष्ट कह दिया था कि वे राम को नहीं मानते। वह आदमी नहीं था, काल्पनिक है वो। रामायण की कुछ पंक्तियां पढ़ने योग्य जरूर हैं, लेकिन राम भगवान थे, यह हम मानने को तैयार नहीं हैं। रामायण को काल्पनिक और राम को रामायण का एक पात्र भर बताने वाले माझी ने पंडितों पर भी कटु टिप्पणी की थी। कहा था- रामायण की अच्छी बातों को मानता हूं, लेकिन राम को भगवान नहीं मानता।

शिक्षा मंत्री के बयान के बाद विवाद : श्री माझी को तो कम से कम रामचरित मानस में अच्छी बातें भी दिखती हैं, लेकिन चंद्रशेखर को यह नफरती ग्रंथ लगता है। चंद्रशेखर के बयान पर अब विवाद शुरू हो गया है। अयोध्या के संत परमहंस आचार्य ने चंद्रशेखर को बरखास्त करने की मांग की है। संत ने तल्ख बयान देते हुए चंद्रशेखर की जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ के इनाम की भी घोषणा कर दी है। परमहंस मानते हैं कि यह सनातनी लोगों का अपमान है। मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। उन पर कानूनी कार्वाई होनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो मंत्री की जीभ काट कर लाने वाले को 10 करोड़ इनाम देने की मैं घोषणा करता हूं।

*राजनीति पर चंद्रशेखर के बयान का असर* : हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ खतरनाक साबित हो सकता है। बीजेपी को इसका लाभ मिल सकता है। बीजेपी अभी हिन्दुओं की सबसे बड़ी पैरोकार पार्टी मानी जाती है। अयोध्या में राम मंदिर के नाम पर ही वह अभी देश की बागडार संभाल रही है। बीजेपी की इस ताकत को अब राहुल गांधी जैसे कांग्रेस के कद्दावर नेता भी समझने लगे हैं। इसीलिए राहुल गांधी बीजेपी की नकल करते हुए मंदिरों में जाते हैं। जनेऊ पहनते हैं। पूजा-पाठ करते हैं। दूसरी ओर हिन्दू वोटों की परवाह किये बगैर चंद्रशेखर जैसे नेता हिन्दू भावनाओं को आहत करने में लगे हैं। बीजेपी इस मुद्दे को भुनाने में पीछे नहीं रहेगी। बिहार भाजपा के नेता विजय कुमार सिन्हा ने सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को ट्वीट कर चंद्रशेखर को इस बयान के लिए बरखास्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि चंद्रशेखर के बयान ने करोड़ों हिन्दुओं की भावना को आहत किया है। अगर नीतीश जी और तेजस्वी जी इनके बयान से सहमत हैं तो अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

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