*फुटपाथ पर दुकानदारों की मांग को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त,नगर आयुक्त व डीएम से मिले शिष्टमंडल*

जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना, भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
31 अगस्त 2022

भागलपुर : फुटपाथी दुकानदारों को उजाड़ने से पहले बसाने की मांग को लेकर मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सह फुटपाथ दुकानदार बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक निरंजन साहा की अगुवाई में एक शिष्टमंडल प्रमंडलीय आयुक्त, नगर आयुक्त एवं जिला पदाधिकारी से मिलकर अपने दर्द को साझा करते हुए अपने तथा बाल-बच्चों से जुड़े पेट के सवाल को रखा और कहा कि हमें उजाड़ने से पूर्व बसाने की प्रक्रिया किये जाएं।

शिष्टमंडल का नेतृत्व करते हुए भाजपा नेता सह संरक्षक निरंजन साहा ने उक्त अधिकारियों को बताया कि विगत 5 दशकों से घंटाघर के दुकानदार पीढ़ी दर पीढ़ी यहां पर रोजगार करते आ रहे हैं। शहर की एक चौथाई आबादी का भरण-पोषण इसी स्थान पर रोजगार के माध्यम से चलता आ रहा है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान स्वरूप आंधी-तूफान को भी यह दुकानदारगण झेलते आ रहे हैं लेकिन आज तक इन दुकानदारों के स्वामित्व की चिंता किसी ने कभी नहीं की, परिणाम स्वरूप आज भी यह दुकानदार वक्त के थपेड़े झेलते आ रहे हैं। लंबे संघर्ष व आंदोलनों के बाद तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त हेमचंद्र सिरोही में उस वक्त भागलपुर की सुध ली थी और उन्होंने भागलपुर के विकास की योजनाओं पर गहन चिंतन करने के उपरांत योजनाओं को स्वीकारा था। उन्होंने अधिकारियों को स्मरण कराते हुए कहा कि इसी क्रम में घंटाघर के 350 दुकानदारों को आश्वस्त भी किया गया था कि आप सबों के दुकानों को स्थाई किया जाएगा और इसी आधार पर उस समय पूर्व से नगर निगम के द्वारा किराया के मध्य में राजस्व वसूली की जाती थी। उन्होंने बताया कि उस समय तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त के द्वारा एक नीति बनाई गई थी। प्रथम श्रेणी में वैसे दुकानदार थे, जिनका नाम निगम द्वारा लिया गया किराया अद्यतन अपटू डेट था। द्वितीय श्रेणी में वैसे दुकानदार थे जिनका किराया छ: से माह 8 माह तक बकाया था, तृतीय श्रेणी में वैसे दुकानदार थे जिसका कम से कम 1 वर्ष या उससे अधिक का किराया बाकी था। उन्होंने बताया कि प्रथम श्रेणी की सूची में 60 दुकानदारों का चयन हुआ, जिसे घंटा घर चौक स्थित राजकीय शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्रांगण में आम सभा बुलाकर शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति में तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त के द्वारा लॉटरी के माध्यम से स्थान चिन्हित कर उन्हें दुकान आवंटित किया गया तथा उसका किराया 300 एवं रखरखाव के लिए 200 यानि कुल 500 रुपये प्रति माह तय कर दिया गया। इस दौरान दुकान निर्माण के लिए प्रति दुकान 15 हजार रुपये जमानत राशि के रूप में नगर निगम में जमा करने के लिए दुकानदारों को निर्देशित किया गया तथा नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई कि इसी राशि से चिन्हित स्थानों पर दुकान बनाकर दुकानदारों के हवाले कर दिये जाएं और फिर उनसे तय किए गए मासिक किराया वसूले जाएं।

श्री साहा ने बताया कि सभी साठों दुकानदारों ने नगर निगम में यह राशि जमा कराई और नगर निगम ने दुकान का निर्माण कराकर 50 दुकानदारों को दुकान आवंटित कर दिया, शेष 10 दुकानों का निर्माण कार्य किसी कारणवस ससमय पूरा नहीं हो पाया, जो अभी तक लंबित है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद उक्त 60 दुकानों का किराया आज तक अद्यतन और अग्रिम है। तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त का अचानक स्थानांतरण हो जाने से उक्त योजनाएं न केवल आज तक अधूरी है बल्कि इस दरमियान कई बार अतिक्रमण के नाम पर उजड़ते हुए यह दुकानदार पुनर्वास की बाट अब तक जोह रहे हैं।

श्री साहा ने बताया कि नगर निगम के द्वारा अतिक्रमण मुक्त अभियान के तहत ये दुकानदार उजड़ते और फिर सजते रहे हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने से ज्यादा पुनर्वास की ठोस योजना बनाने की चिंता यदि किए जाएं, तो अतिक्रमण हटाओ अभियान की जरूरत कभी नहीं पड़ेगी। उन्होंने नगर आयुक्त द्वारा जारी पत्रांक 2292/28.8.22 की सूचना को एक हफ्ते में सभी आवंटित दुकानें खाली कर दें तदोपरांत नए सिरे से आवंटन की प्रक्रिया की जानी है, अन्यथा बलपूर्वक खाली कराया जाएगा का हवाला देते हुए कहा कि इस बिंदु पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए पुनर्वास के ठोस योजना पर विचार विमर्श किए जाने की मांग की और कहा कि इसके लिए हमारा संगठन आपके हर सकारात्मक निर्णय का स्वागत करेगा।

श्री साहा ने बताया कि घंटाघर के इर्द-गिर्द विकास की अपार संभावनाएं हैं,यहां पर पर्याप्त सरकारी भूखंड उपलब्ध है, जिसे बाजार का स्वरूप देकर विकसित किया जा सकता है। महू में घंटाघर चौक के पूरब और उत्तर दिशा में नगर निगम की बड़ी संपत्ति वर्षों से योजनाबद्ध तरीके से अतिक्रमित होने की चर्चा करते हुए बताया कि यहां पर स्थित चर्च के इर्द-गिर्द का बड़ा भूभाग जिस पर चर्च वालों का अनाधिकृत कब्जा है और जिस के कुछ हिस्सों की बिक्री की चर्चा आजकल जोरों पर है तथा यहां पर एक विशालकाय व्यापारिक परिसर निर्माणाधीन है। उन्होंने कहा कि एक तरफ हम गरीब मजदूरों के पेट पर लात मारते हुए हमें उतारने की कोशिश हो रही है। वहीं, दूसरी तरफ अपने स्वार्थ के लिए सरकारी जमीन का खर्च कर रहे चर्च के लिए प्रशासन की चुप्पी इस बात को साबित करता है कि इस अनधिकृत काम में उनकी भी मौन स्वीकृति है। उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर नगर निगम के भूखंड पर निगम के नाक तले इतनी बड़ी योजनाओं पर काम चल रहा है? मामले को गंभीर शोध का विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पर अभिलंब जांच कमेटी का गठन किया जाए और जब तक जांच पूरी नहीं होती है तब तक चर्च के निर्माणाधीन कार्य पर प्रतिबंध लगाया जाए।
शिष्टमंडल का नेतृत्व कर कर रहे श्री साहा की विस्तृत बातों को सुनते हुए नगर आयुक्त ने जहां वर्तमान दुकानदारों का किराया कम होने का बहाना करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में अभी समय लगेगा। वहीं, प्रमंडलीय आयुक्त ने इस मामले को जांच पड़ताल कर देखने दिखाने की बात कही। इसके साथ ही डीएम सुब्रत कुमार सेन ने चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें दुकानदारों से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इन दुकानदारों की वजह से जो यातायात बाधित होता है और जाम की समस्या उत्पन्न होती है, वह दिक्कत कारण है। उन्होंने अभी पर्व त्योहारों को देखते हुए वह तो दुकानदारों को राहत देने की बात की।

तत्पश्चात निरंजन साहा ने अपने आवास पर प्रेस वार्ता का आयोजन कर मीडिया कर्मियों को विस्तृत बातों की जानकारी दी और कहा कि किसी भी हाल में फुटपाथ दुकानदारों को अब उजाड़ने नहीं दिया जाएगा, भले ही इसके लिए जिला प्रशासन के साथ दो-दो हाथ करते हुए हम दुकानदारों को आर-पार की लड़ाई लड़नी पड़े। उन्होंने नगर निगम की मनमानी और चर्च के द्वारा सरकारी जमीन को खर्च किए जाने का हवाला ले देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की भी बात की। आयोजित प्रेस वार्ता में राजेश कुमार साह, मनोज मंडल, राकेश कुमार साह, अवधेश मंडल, शशि कला देवी, वासुदेव मंडल, राजन सूरी, विजय शाह मोहम्मद निजाम, अबोध मंडल, राजकुमार, रामलाल साह, दिनेश साह, दिलीप झा, विजय प्रसाद साह, इंद्रदेव मंडल रामप्रसाद साह सहित दर्जनों दुकानदार मौजूद थे।

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