कड़ाई और कार्रवाई के बाद भी नहीं रुकी तस्करी

जनपथ न्यूज़ डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
10 जनवरी 2022

भागलपुर : बिहार के भागलपुर जिले के गलत लोगों को न तो कानून की परवाह है और न ही पुलिस-प्रशासन का डर। उनके पास युवाओं की बड़ी फौज है। कल तक उनके पास 50-100 रुपये नहीं थे, आज लाखों-करोड़ों का धंधा करते हैं। बिहार में शराबबंदी जिनके लिए वरदान बन गई है। हम बात कर रहे हैं शराब तस्करों की। शराबबंदी कानून को धता बताते हुए 15 शराब तस्करों ने भागलपुर और आस-पास के जिले में शराब तस्करी का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर रखा है। इनमें दस तस्कर भागलपुर व आस-पास के जिले के हैं। इनके इशारे पर ही झारखंड, हरियाणा और यूपी से शराब की तस्करी होती है। ये शराब तस्कर मुंबई के अंडरवर्ल्ड की तर्ज पर काम कर रहे हैं।

जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन दुनिया के किसी कोने में बैठकर देश के अंदर आपराधिक गतिविधियां संचालित करते रहे हैं, ठीक इसी तरह ये शराब तस्कर जेल में रहें या फिर भागलपुर से बाहर, इनके इशारे पर शराब तस्करी का काम निर्बाध चलता रहता है। इनका नेटवर्क इतना मजबूत है कि ये सिर्फ इशारा करते हैं और लाखों-करोड़ों की शराब की खेप एक से दूसरे राज्य के निर्धारित ठिकाने पर पहुंच जाती है। ऐसे तस्करों की गिरेबान तक कई बार पुलिस पहुंची। वे जेल भी गये, मगर कुछ असर नहीं.जेल से निकलने के बाद फिर वही धंधा। अब हालत यह है कि पुलिस-प्रशासन व उत्पाद विभाग को शराब तस्करों और आदतन शराब तस्करों की अलग से सूची तैयार करनी पड़ रही है।

भागलपुर पुलिस-प्रशासन के टॉप 15 शराब तस्करों की लिस्ट में हरियाणा निवासी रोहित और अमित, उत्तर प्रदेश निवासी कर्मवीर सिंह, पानीपत निवासी नवीन सिंह और बिट्टू, राहुल कुमार, सत्यम शिवम सुंदरम, मोहन कुमार, धर्मेंद्र यादव, राकेश कुमार, रूपेश यादव, असारुल अंसारी, मनोज चौधरी, रौशन कुमार और शेषनाथ राय शामिल हैं। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक इनमें कुछ तस्करों को तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से फॉलो किया जा रहा है। इसके साथ ही जिन राज्यों, जिलों और इलाकों में ये रहते हैं, वहां की थाना पुलिस से संपर्क कर उन पर निगरानी रखने और हर माह उनकी वर्तमान गतिविधि की रिपोर्ट भी तलब की जा रही है।

तीन बार जेल जाकर भी चला रहा धंधा : सूची में शामिल सत्यम शिवम सुंदरम भागलपुर से बाहर रहते हुए तस्करी के नेटवर्क को निर्बाध चला रहा है। तीन-तीन बार गिरफ्तार होने के बाद भी सत्यम शिवम सुंदरम इस धंधे में सक्रिय है। वर्तमान में कोर्ट ने सत्यम शिवम सुंदरम के विरुद्ध शराब के ही मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इसके बाद से पुलिस लगातार उसे ढूंढ रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए और शराब तस्करी के धंधे को संचालित करने के लिए उसने भागलपुर छोड़ दिया। झारखंड और बंगाल के बीच उसका ठिकाना होने की चर्चा है। सत्यम शिवम सुंदरम का नाम सबसे पहले वर्ष 2018 में आया था। 11 मार्च 2018 को जीरोमाइल थाना क्षेत्र के झंझरी पुल के पास से ट्रक पकड़ाया, जिसमें 370 पेटी विदेशी शराब बरामद की गयी थी।

हर कार्रवाई के बाद बदला तस्करी का तरीका : वर्ष 2016 में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद अब तक पुलिस ने शहर समेत भागलपुर जिले में लाखों लीटर शराब बरामद की। शराब तस्करी में इस्तेमाल किये जाने वाले सैकड़ों वाहनाें को जब्त किया गया। वाहनों की नीलामी तक हुई। हजारों शराबियों व शराब के तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। शराब की तस्करी से अवैध संपत्ति अर्जित करने वाले सैकड़ों लोगों को पुलिस-प्रशासन ने चिह्नित कर उनकी संपत्ति को जब्त करने का भी प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा। बावजूद इसके बंद होने की जगह शराब की तस्करी बढ़ती गयी। हर कार्रवाई के बाद शराब तस्करी का तरीका बदलता रहा। कभी ट्रक और हाइवा से, तो कभी एंबुलेंस और सेप्टिक टैंक क्लीनर वाले वाहन से शराब की तस्करी होती रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी : इस बावत भागलपुर मद्य निषेध एवं उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार ने बताया कि शराबबंदी कानून का भागलपुर जिला में सख्ती से अनुपालन कराया जा रहा है। मद्य निषेध पुलिस सहित भागलपुर और नवगछिया की पुलिस लगातार छापेमारी कर शराब तस्करी और अवैध कारोबार के मामलों को उजागर कर रही है। बड़े और आदतन शराब तस्करों की सूची बना कर उन पर नजर रखी जा रही है। इंटर स्टेट शराब माफियाओं के विरुद्ध भी कार्रवाई को लेकर पटना सचिवालय के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। शराबबंदी कानून में पुलिस और प्रशासनिक टीम अपना कार्य कर रही है। इसमें जिलावासियों के भी सहयोग की जरूरत है। सूचना देनेवालों का नाम-पता गुप्त रखने का प्रावधान है।

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