जनपथ न्यूज़ डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
10 जनवरी 2022

भागलपुर/पटना: बिहार के सीएम नीतीश कुमार पिछले दो साल से अपने बोल-बयान को लेकर चर्चा का केंद्र बनते रहे हैं। 2020 के बिहार असेंबली इलेक्शन से नीतीश कुमार के तल्ख तेवर दिखने शुरू हुए थे। बाद में विधानसभा में उनकी खीझ उजागर होती रही। कभी लालू घराने के बारे में उनकी टिप्पणी चर्चित रही तो हाल ही में शराब से मौतों में मुआवजे के सवाल पर सदन में उन्होंने बीजेपी नेताओं के लिए तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल किया। सोमवार को अपनी समाधान यात्रा के क्रम में वह वैशाली में जीविका दीदियों को संबोधित करने में कुछ ऐसा बोल गये,जैसा बोलने में आम आदमी भी कतराता है। नीतीश कुमार से ऐसी सतही भाषा की उम्मीद ही नहीं की जा सकती है। नीतीश मर्यादित आचरण, संयमित बयान और शांत मन-मिजाज के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों में उनके इन गुणों का विलोप होता दिख रहा है। व्यक्तिगत टिप्पणी से लेकर सार्वजनिक मंचों पर नीतीश कड़े और बेतुके बोलने लगे हैं। लोग इसे उनकी बढ़ती उम्र और कुर्सी के लिए जलालत सहने की मजबूरी का नतीजा मानने लगे हैं। आइए पढ़ते हैं, नीतीश कुमार के कुछ ऐसे बयान,जहां उन्होंने आपा खोया और मर्यादा लांघी है।
चुनाव प्रचार के दौरान 2020 में आपा खोते रहे नीतीश : नीतीश कुमार की छवि मुश्किल हालात में भी शांत रहने की रही है। 2020 के बिहार असेंबली इलेक्शन में प्रचार के दौरान उनकी इस विशेषता का लोप होते पहली बार लोगों ने देखा था। नीतीश रैलियों के दौरान अपने खिलाफ नारे लगाने वालों से न सिर्फ नाराज हो रहे थे, बल्कि तल्ख अंदाज में जवाब भी देते रहे थे। उन्होंने चुनाव के दौरान आरजेडी अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व उनके परिवार पर तीखे हमले किये। मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली में युवाओं ने जब नीतीश वापस जाओ का नारा लगाया तो नाराज नीतीश ने रैली में कहा- ‘कुछ लोगों को ना ज्ञान है ना अनुभव। आप सभी युवा हैं, जाइए और अपने माता-पिता से पूछिए कि यहां क्या स्थिति थी। अपने माता-पिता से पूछें कि क्या वे अंधेरा होने के बाद अपने घर से बाहर निकल सकते थे। क्या स्कूलों में कोई पढ़ाता था? क्या लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं? पहले हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रति माह केवल 39 व्यक्ति आते थे, अब 10 हजार लोग इन सुविधाओं का लाभ उठाते हैं।‘ अपरोक्ष तौर पर उनका हमला लालू-राबड़ी पर था। इनके ही शासन में शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था में गिरावट का आरोप लगा कर नीतीश ने 2005 में कामयाबी हासिल की।

लालू के समर्थन में नारा लगाने पर भड़के थे नीतीश : बेगूसराय के तेघड़ा में नीतीश की चुनावी रैली में भीड़ के एक वर्ग ने जब लालू प्रसाद यादव के समर्थन में नारे लगाए, तो नीतीश भड़क गए। उन्होंने प्रतिक्रिया दी, ‘अगल बगल देख लो, जिसके लिए कर रहे हो, ये लोग सबको जवाब देंगे, सब का हाल ठीक कर देंगे।’ उनके इस जवाब के केंद्र में 1990 और 2005 के बीच का लालू-राबड़ी का शासन था। नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी पर नाम लिये बगैर तल्ख अंदाज में हमला किया था। उन्होंने कहा- ‘जाओ और अपने पिता से पूछो, क्या उन्होंने सत्ता में रहते हुए कोई स्कूल बनाया था? पढ़ना है तो अपने मां-बाप से जाकर पूछो कि कोई स्कूल या कॉलेज था क्या? जब उन्हें शासन करने का मौका मिला, तो उन्होंने केवल अपने लिए काम किया। जब वह जेल गए, तो उन्होंने अपनी पत्नी को सीएम बनाया।’

छपरा में भी लालू परिवार को निशाना बनाया था : 2020 के ही 21 अक्टूबर को छपरा जिले के परसा में जेडीयू प्रत्याशी चंद्रिका राय के पक्ष में वह प्रचार के दौरान भी भड़के थे। रैली के दौरान भीड़ का एक हिस्सा लालू प्रसाद के समर्थन में नारे लगाने लगा। नीतीश कुमार भड़क गये। कहा- ‘अरे, तुम क्या कह रहे हो।’ इसके बाद नीतीश कुमार ने नाराज भीड़ के उस वर्ग को बाहर निकलने का निर्देश दिया। चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या की शादी लालू के बेटे तेज प्रताप से हुई है। तेज प्रताप ने तलाक की अर्जी कोर्ट में दी है। अपने भाषण में नीतीश ने ऐश्वर्या के साथ बुरा बर्ताव करने के लिए लालू प्रसाद के परिवार पर हमला किया। उन्होंने कहा- ‘वह एक शिक्षित महिला है, आप सभी ने देखा कि शादी के बाद उन्होंने उसके साथ कैसा व्यवहार किया। ऐसा नहीं होना चाहिए था। महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार करने के परिणाम वह जल्द ही भोगेंगे।’

जीविका दीदियों को जनसंख्या नियंत्रण का गुर ऐसे सिखाया नीतीश ने : नीतीश कुमार का ताजा विवादास्पद बयान वैशाली में जनसंख्या नियंत्रण पर आया है। जीविका दीदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था- ‘मर्द लोग जिस तरह रोज-रोज करते ही रहता है, अगर महिलाएं शिक्षित हो जाएंगी तो जनसंख्या नियंत्रण खुद हो जाएगा।’ नीतीश कुमार के इस बयान ने बिहार की सियासत में सर्द मौसम में भी गर्मी ला दी है। सरकार और नीतीश की आलोचना की ताक में बैठी बीजेपी को मौका मिल गया है। बिहार विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने इसे अशोभनीय और अमर्यादित बताया है।

असेंबली में तेजस्वी यादव पर भड़क गये थे नीतीश कुमार : अक्तूबर 2020 में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जब नीतीश कुमार पर आरोप लगाया था कि वह 1991 में हुई एक हत्या में शामिल हैं। उसके बाद सीएम नीतीश कुमार भड़क गये। उन्होंने कहा- ‘जो बात ये बोल रहा है, उसकी जांच होनी चाहिए और इसके खिलाफ कार्रवाई होगी। ये झूठ बोल रहा है। मेरे भाई समान दोस्त का बेटा है, इसीलिए मैं सुनता रहता हूं। इसके पिता को विधायक दल का नेता किसने बनाया था, क्या उसको पता है? इसको उपमुख्यमंत्री किसने बनाया था इसको पता है? इसके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो हमने उससे कहा कि जवाब दो, मगर जब जवाब नहीं दिया तो हम अलग हो गए। हम कुछ नहीं बोलते हैं। तेजस्वी पर चार्जशीट है। 2017 में क्यों नहीं स्थिति स्पष्ट किया था..?’

भाजपा के साथ रहते विधानसभा अध्यक्ष पर भड़के थे नीतीश : भाजपा के साथ सरकार चलाते समय सीएम नीतीश कुमार तत्कालीन विधानसभाध्यक्ष विजय सिन्हा पर भड़क गये थे। लखीसराय में हत्याओं से संबंधित एक सवाल पर सीएम नीतीश कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि क्राइम हुआ है तो उसकी रिपोर्ट कोर्ट में जाएगी। रिपोर्ट विधानसभा को नहीं जाएगी। विजय सिन्हा से उन्होंने कहा- ‘आप संविधान का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इस तरह से सदन नहीं चलेगा। विशेषाधिकार समिति जो रिपोर्ट देगी, हम उस पर जरूर विचार करेंगे। संविधान से चलता है सिस्टम। कृपया ज्यादा मत करिए। जिसको जिस चीज का अधिकार है, उसको ही करने दीजिए। आप संविधान देख लीजिए। संविधान क्या कहता है। हमारी सरकार न किसी को बचाती है और ना किसी को फंसाते हैं हम।’

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