जनपथ न्यूज़ बंगाल के हावड़ा से लेकर बिहार के मुंगेर तक अवैध हथियारों का ऐसा नेटवर्क है जो सालों से बे-रोकटोक चल रहा है। हाल ही में मुंगेर में एक कुंए से मिली 20 एके-47 रायफलों के बाद दैनिक भास्कर ने इस नेटवर्क को खंगालने का जिम्मा लिया। इस पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

हावड़ा के पास सलकिया मोहल्ले में सैकड़ों मशीनें चलती थीं। प्रदूषण के नाम पर इन्हें रामपुर और जीटी रोड के किनारे शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन बजरंगबली के नाम से चर्चित यह इलाका अर्धनिर्मित हथियारों को लेकर खास हो गया। इसी इलाके की एक लेथ मशीन पर लोहा गलाने वाली फैक्ट्री से आए अर्द्धनिर्मित पिस्टल की फिनिशिंग हो रही थी। पूरा धंधा कुरियर से चल रहा है। जैसा हथियार चाहिए, वैसा बना देते हैं। जहां पहुंचाना है, वहां भिजवा देते हैं। दैनिक भास्कर टीम ने अपनी आंखों से हथियार बनते, फिनिश होते और खरीदने के लिए इन तस्करों से बात की।

रिपोर्टर: कैसे बनाते हो पिस्टल का ढांचा?
कारीगर: जैसा पार्टी ऑर्डर देती है वैसा ही बना देते हैं
रिपोर्टर : रॉ मैटेरियल से कैसे बनाते हैं पिस्टल का ढांचा?
कर्मचारी : पार्टी ऑर्डर देती है। कट्टा है, नाप कर काट देते हैं।
रिपोर्टर: दिखाएंगे?
कर्मचारी: मैं आपको नहीं पहचानता। आप अंदर कैसे आए?
रिपोर्टर : पहचानने की बात क्या है?
कर्मचारी : लेथ मालिक बाबू आएगा, पूछेगा कैसे अंदर आने दिया तो क्या कहूंगा? सिर्फ घूमो, कुछ उठाओ मत।
रिपोर्टर : आप यहां कर्मचारी हैं, यह किसकी कंपनी है?
कर्मचारी: हां, कर्मचारी हूं। यह ओमरा कंपनी की है। (ऊपर फैक्ट्री का नाम भी दिखाया)
रिपोर्टर: एक हथियार पर कितना फायदा होता होगा?
कर्मचारी: नहीं बता सकता।
 रिपोर्टर : इस फैक्ट्री में किस-किस तरह के काम होते हैं?
कर्मचारी: छोटा-बड़ा सब होता है, जैसा चाहोगे, वैसा होगा।
फाइव स्टार होटल में मिला लेथ मालिक बाबू
अब बारी लेथ मालिक बाबू से बात करने की थी। पहले श्याम मंदिर के पास चल रहे आधा दर्जन लेथ मशीनों को खंगाला। पता चला, वह कालीघाट के पास मिलेगा। हम कालीघाट गए। वह नहीं मिला। अगला ठिकाना बगड़ी मार्केट बताया गया। वहां पता चला कि बाबू कोलकाता के सबसे बड़े होटल में है। फोन पर बात हुई तो बाबू ने होटल में ही बुला लिया। मिलते ही हमने मकसद बताया। बाबू बोला- धंधे से जुड़ना चाहते हो। ऑर्डर बुक करना है तो कल बड़ा बाजार आना। वहीं बॉस मिलेगा।
रिपोर्टर : 9 एमएम की पिस्टल कितने की है?
सप्लायर: यही कोई 80 से 90 हजार के बीच
 
रिपोर्टर : पिस्टल का रेट क्या है?
शकरूउद्दीन:  40 हजार।
रिपोर्टर: फिनिशिंग तो है नहीं?
शकरूउद्दीन: हां, वह मुंगेर में होगी।
 
रिपोर्टर: वहां कितना देना होगा?
शकरूउद्दीन: सही दाम लगेगा।
 
रिपोर्टर: किनसे मिलना होगा?
शकरूउद्दीन: सलीम भाई से।
 
रिपोर्टर: दिक्कत नहीं होगी ना। अभी नया हूं मैं?
शकरूउद्दीन: कोई डर नहीं।
 
रिपोर्टर: पुलिस सख्त है अभी।
शकरूउद्दीन: हां, अभी एके-47 को  लेकर यह सख्ती हुई है।
 
रिपोर्टर: कहां-कहां सप्लाई है?
शकरूउद्दीन: यूपी, भागलपुर, आसनसोल। भागलपुर में जहां कहेंगे, कुरियर पहुंचा देगा।
 
रिपोर्टर: 9 एमएम का क्या लगेगा?
शकरूउद्दीन: 80-90 हजार।
 
रिपोर्टर: कितना माल भागलपुर भेज देते हैं।
शकरूउद्दीन: जानकर क्या कीजिएगा।
 
मुंगेर में पिस्टल फिनिशिंग का बड़ा कारोबार
मुंगेर में अवैध हथियार निर्माण और तस्करी कुटीर उद्योग की तरह है। यहां मिले एके-47 और पार्ट पुर्जाें से यह साफ हो रहा है। यहां के कारीगर कुशल हैं। पहले यहीं लेथ मशीन पर पिस्टल की बॉडी व बैरल बनाई जाती थी और फिनिशिंग भी होता था। पुलिसिया दबिश के कारण हथियारों की बाॅडी और बैरल पश्चिम बंगाल में बनाए जा रहे हैं। वहां से बड़े पैमाने पर तस्करी कर अर्धनिर्मित हथियार मुंगेर आते हैं और फिर यहां कुशल कारीगर इसकी फिनिशिंग करते हैं। यही कारण रहा कि पिछले छह माह में पुलिस व एसटीएफ ने 302 पिस्टल की बॉडी मुफस्सिल क्षेत्र से बरामद की।
 
गलियों के एक कोने में मिला हथियारों का सरगना शक्कू
हम बड़ा बाजार पहुंचे। यह गली बिल्कुल सकरी थी। एक कमरे में प्रवेश िकया। यहां दो युवक बैठे थे पर यहां बाबू नहीं था। एक युवक चेहरे पर चादर बांधकर कमरे में आया लोगों ने उसे शक्कू भाई सलाम कहकर गले से लगा लिया। शक्कू के चेहरे पर एसिड फेंका गया था, इसलिए उसने चादर ओढ़ रखी थी। शक्कू से मेरा परिचय हुआ। धंधे की बात पर वह हथियार दिखाने लगा। तीन पिस्टल हाथ में ले शक्कू भाई उर्फ शकरूउद्दीन सोफे पर आ गया। फिर सौदेबाजी शुरू हुई।

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