राहील सिद्दीकी /भागलपुर
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का गैरजिम्मेदार रबैया फिर देखने को मिला।
यहां के पदाधिकारी बड़े बड़े दावे आए दिन करते रहते हैं, लेकिन वह किसी भी दावे पर खरे नहीं उतरते इसी का जीता जागता नमूना है PG हिंदी विभाग का चौथे सेमेस्टर के पेपर 14 का प्रश्न पत्र। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के मामले को लेकर पेपर 13 का परीक्षार्थियों ने बायकॉट किया था, लेकिन इसके बाद भी विश्वविद्यालय सुधरने वाला नहीं है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न के लिए विकल्प की व्यवस्था का वादा पिछली बार बायकॉट परीक्षा के बाद विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों द्वारा किया गया था। लेकिन, पेपर 14 में स्थिति और बदतर दिखाई देती है। पेपर 14 ऑप्शनल पेपर होने के कारण इसमें छात्रों को तीन पेपर अलग-अलग चॉइस करना होता है, जिनमें से हिंदी पेपर का प्रश्न पत्र छपा ही नहीं और परीक्षा लेने के लिए हाथ से लिखा प्रश्नपत्र देकर परीक्षा लिया गया जिस कारण 45 मिनट लेट से परीक्षा सुरु हुई। वही दूसरे में वस्तुनिष्ठ प्रश्न के बदले अतिलघुउत्तरीय प्रश्न पूछे गए। अब देखना यह की विश्वविद्यालय के पदाधिकारी कौन सा बहाना बनाकर इस बड़ी गलती को छुपाते हैं। क्योंकि, विश्वविद्यालय में गलतियों की सुधार की दिशा में कदम ना उठा कर पदाधिकारीगण एक और गलती कर उस गलती को छुपाने का हमेशा प्रयास करते रहते हैं।अब सवाल उठता है कि क्या

विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं क्या प्रश्न पत्र PG का ऐसा होना चाहिए। इसके दोषी परीक्षा नियंत्रक एवं परीक्षा प्रभार योगेंद्र महतो को सजा नहीं मिलनी चाहिए।ज्ञात हो कि
इससे पूर्व भी गणित की परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट हुआ था। पार्ट वन हिंदी की परीक्षा में दूसरे पेपर का प्रश्न पत्र दिया गया था एवं परीक्षा विभाग में कई गड़बड़ियां सामने आई है,

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