इसी एजेंसी ने 2021 में ‘उत्पाद अधीक्षक’ के ठिकानों पर मारा था छापा, निलंबन की बजाए जारी है फील्ड पोस्टिंग

जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
www.janpathnews.com
10 नवंबर 2022

भागलपुर/पटना : नीतीश सरकार का भ्रष्टाचार रोकने को लेकर सबसे धारदार हथियार की धार भी अब कुंद होते जा रही है। एक तरफ जांच एजेंसियां भ्रष्ट अधिकारियों-इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी हुई है,वहीं दूसरी तरफ से आरोपी अधिकारियों को विभाग के स्तर से छोड़ा जा रहा है। पिछले साल भर के दौरान मद्य-निषेध व निबंधन विभाग के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। वैसे अन्य विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। मद्य-निषेध व निबंधन विभाग ऐसा है, जहां निलंबन के बाद तुरंत निलंबन मुक्त कर दिया जा रहा है। वहीं, कुछ एक अधिकारी को तो निलंबित भी नहीं किया गया। गुरुवार को फिर से निबंधन विभाग के एक एआईजी के ठिकानों पर छापेमारी की गई। आय से दो करोड़ अधिक अर्जित करने के मामले में विशेष निगरानी इकाई ने एआईजी के तीन ठिकानों पर छापेमारी की। पिछले साल इसी विभाग से जुड़े मोतिहारी के उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने ही छापा मारा था। मगर आज तक उस अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया। आज भी भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारी को सरकार ने फील्ड में पोस्टिंग कर रखा है। इस तरह के मामलों से अब लगने लगा है कि सरकार का सबसे बड़ा हथियार कुंद होते जा रहा है।

एआईजी के ठिकानों पर एसवीयू की छापेमारी : विशेष निगरानी इकाई ने गुरूवार को मुजफ्फरपुर में पदस्थापित निबंधन विभाग के एआईजी प्रशांत कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में छापेमारी की। विशेष निगरानी इकाई ने दो करोड़ 680585 रुपए आय से अधिक का केस दर्ज किया है। कोर्ट से सर्च वारंट लेने के बाद एआईजी प्रशांत कुमार के मुजफ्फरपुर, पटना एवं सिवान में सर्च ऑपरेशन चलाई गई है। इस जांच के क्रम में अकूत संपत्ति का पता चला है।

एसवीयू ने ही उत्पाद अधीक्षक के ठिकानों पर की थी छापेमारी : गौरतलब है कि इसके पहले विशेष निगरानी इकाई ने ही मद्य निषेद व निबंधन विभाग के अधिकारी मोतिहारी के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक अविनाश प्रकाश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में छापेमारी की थी। मोतिहारी के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक अविनाश प्रकाश के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने 9 दिसंबर 2021 को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज कर छापेमारी की थी। इस दौरान एसवीयू का दावा था कि रेड में अकूत संपत्ति का पता चला है। इसमें नोट गिनने की मशीन के साथ-साथ अन्य दस्तावेज मिले थे लेकिन, विभाग ने भ्रष्टाचार के आरोपी उत्पाद अधीक्षक को निलंबित करने की बजाय उन्हें सिर्फ वहां से हटा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद अप्रैल 2022 में ही भ्रष्टाचार के आरोपी अधीक्षक अविनाश प्रकाश को बेगूसराय का उत्पाद अधीक्षक के पद पर पोस्टिंग कर दिया गया। इस तरह से भ्रष्टाचार के आरोपी को विभाग ने फील्ड पोस्टिंग दे दी। एसवीयू की जांच में सामने आया कि अविनाश ने आय के वैध स्रोत से अधिक धनार्जन कर संपत्ति बनाई है। इसके लिए उन्होंने परिजनों व मित्रों तथा अन्य के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर कालेधन को सफेद बनाने का भी प्रयास किया है। एसवीयू के सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों को इडी को दिया जा सकता है। इसके साथ ही अविनाश के मामले में जल्द चार्जशीट भी फाइल होगी ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके। तलाशी के दौरान 2 पासपोर्ट,15 पासबुक, 4 इश्योरेंस से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई थी। उत्पाद अधीक्षक की पत्नी के नाम से कुल 41 डिसमिल में निर्मित तीन फ्लैट जिसकी कीमत 8.25 लाख और पिता के नाम से 800 डिसमिल जमीन जिसकी कीमत 48.5 लाख का पता चला था। अविनाश पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए नाजायज ढंग से अकूत संपत्ति अर्जित की है, जो उनके द्वारा प्राप्त वेतन एवं अन्य ज्ञात स्रोतों की तुलना में बहुत ही अधिक है।

धनकुबेर अवर निबंधक निलंबन मुक्त : मोतिहारी के तत्कालीन जिला अवर निबंधक बृज बिहारी शरण के खिलाफ 2 फरवरी 2022 को निगरानी ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। इसके बाद मोतिहारी समेत पटना के ठिकानों की तलाशी ली। तलाशी में रिश्वत के पैसे से संपत्ति अर्जित करने का खुलासा हुआ था। इसके बाद मद्ध निषेध-निबंधन विभाग ने अवर निबंधक बृज बिहारी शरण को 21 फरवरी 2022 को निलंबित कर दिया था। समस्तीपुर के तत्कालीन जिला अवर निबंधक मणीरंजन के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने 16 दिसंबर 2021 को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस किया था। ठिकानों पर छापेमारी में 70 लाख से अधिक कैश मिला था, वहीं करोड़ों की चल-अचल संपत्ति का पता चला था। इसके बाद सरकार ने 18 दिसंबर 2021 को निलंबित कर दिया गया था।

न्यायालय के आदेश पर ही फील्ड पोस्टिंग : पूर्णिया के तत्कालीन जिला अवर निबंधक उमेश प्रसाद सिंह के खिलाफ निगरानी ब्यूरो ने 12 फरवरी 2022 को आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। इसके बाद 15 मार्च 2022 को इन्हें निलंबित कर दिया गया। अब इन तीनों अधिकारियों को निलंबन से मुक्त करते हुए संवर्गीय पद पर पदस्थापित कर मद्य निषेध का कार्य आवंटित किया गया है। यह तीनों अधिकारी इथेनॉल मूवमेंट का अनुश्रवण करेंगे। बृज बिहारी शरण को बांका में इथेनॉल मूवमेंट के अनुश्रवण की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मणिरंजन को गोपालगंज में इथेनॉल मूवमेंट का अनुश्रवण करेंगे। जबकि उमेश प्रसाद सिंह को हरिनगर, सुगौली लोरिया से इथेनॉल मूवमेंट को देखेंगे। मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि इन अधिकारियों का फील्ड पोस्टिंग नहीं होगा जब तक न्यायालय का निर्णय प्राप्त न हो जाए।

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