अब जरूरी हो गया है पूर्व विधायकों की पेंशन की हदबंदी

जनपथ न्यूज
आलेख
अलेखाकार गौतम सुमन गर्जना/भागलपुर
14 नवंबर 2022

राजनीति के संदर्भ में बात करें तो बिहार की जमीन पर तीन भगवान हैं: लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी। ये चाहें तो गधा को पहलवान बना दें। मंत्री को सड़क पर ला दें और किसी भी कार्यकर्ता को पेंशनभोगी बना दें। उदाहरण तो पतझड़ के पत्‍तों की तरह उधिया रहे हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए पेंशनभोगी बनना सबसे स्‍वर्णिम अवसर है। बिहार में एक दिन के लिए विधायक या विधान पार्षद बन जाईये और जिदंगी पर पेंशन भोगी बने रहिये। 13वीं विधान सभा के सदस्‍य बिना वेतन के ही पेंशन भोगी हो गये। 16वीं विधान सभा के‍ लिए निर्वाचित एक सदस्‍य का देहांत शपथ ग्रहण से पहले ही हो गया, लेकिन उनकी पत्‍नी को पारिवारिक पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है।

हे भगवान! हम बस एक दिन का विधायक बनके पेंशनभोगी बन जाने की प्रार्थना करते हैं। आप एक दिन के विधायक हों या 25 वर्ष के विधायक हों, भूतपूर्व सदस्‍य के रूप सुविधाएं एक समान मिलती हैं। लेकिन, पेंशन राशि विधायकी की उम्र बढ़ने के साथ ही बढ़ती जाती है। राज्‍य सरकार ने 4 साल बाद पूर्व या वर्तमान विधायकों के वेतन, भत्‍ता, पेंशन और अन्‍य सुविधाओं में बढ़ोत्‍तरी की है।

संसदीय कार्य विभाग की 9 नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, एक दिन से लेकर एक साल तक विधायक रहने वाले व्‍यक्ति को 45 हजार रुपये की प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। पहले यह राशि 35 हजार थी, जिसमें 10 हजार की बढ़ोत्‍तरी की गई है। इसके साथ हर वर्ष के हिसाब से 4 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। पहले यह राशि तीन हजार थी। अब पांच साल की अवधि पूरा करने वाले पूर्व विधायक को 61 हजार रुपये की पेंशन प्रतिमाह मिलेगी। सरकार ने यात्रा कूपन में भी बढ़ोत्‍तरी की है। पूर्व सदस्‍यों को पहले प्रतिवर्ष डेढ़ लाख राशि का कूपन मिलता था। इसे 50 हजार बढ़ा दिया गया है और अब पूर्व सदस्‍यों को 2 लाख रुपये मूल्‍य का कूपन प्रतिवर्ष मिलेगा। मेडिकल की सुविधा पूर्व और वर्तमान सदस्‍यों को समान रूप से मिलती है।
अब वर्तमान सदस्‍यों की सुविधाओं में हुई बढ़ोत्‍तरी की बात करते हैं। बिहार विधान मंडल (सदस्‍यों का वेतन, भत्‍ता और पेंशन) नियमावली 2022 के अनुसार, विधायकों का मासिक वेतन 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय भत्‍ता में 5 हजार बढ़ोत्तरी करते हुए उसे 55 हजार रुपये कर दिया गया है। विधायक अब चार पहिया वाहन के लिए 15 लाख की जगह 25 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। यह कर्ज एक टर्म के लिए एकही बार मिलेगा। विधायकों का मील भत्ता भी 20 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। कार्यालय संचालन के लिए पहले प्रतिमाह 10 हजार रुपये मिलता था, अब 15 हजार रुपये मिलेंगे। विधायक के निजी सहायक का मानदेय 30 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है। इस के साथ ही विधायक के दैनिक भत्‍ते में एक हजार रुपये की बढ़ोत्‍तरी की गई है। अब प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक भत्‍ता 3 हजार रुपये मिलेंगे। विधायक अब प्रतिवर्ष 3 लाख की जगह 4 लाख रुपये मूल्‍य के कूपन ले सकते हैं। विधायकों को पहले आवास भत्‍ता के लिए 35 हजार रुपये मिलते थे, अब 43 हजार रुपये मिलेंगे। इसमें बिजली बिल समाहित है। सरकारी आवास में रहने वाले विधायक को प्रतिवर्ष 30 हजार यूनिट बिजली मुफ्त मिलेगी। पहले 2 हजार यूनिट प्रति माह फ्री बिजली थी, अब उसका निर्धारण यूनिट में बढ़ोत्‍त्‍री करके वार्षिक आधार पर किया गया है।

इन सारी सूचनाओं के बाद एक सवाल भी है कि एक विधायक का मासिक वेतन 50 हजार रुपये है और एक दिन के पूर्व विधायक का मासिक पेंशन 45 हजार रुपये है। पेंशन और वेतन के निर्धारण में ऐसी विसंगति और किसी क्षेत्र में नहीं मिलेगी। सवाल यह भी है कि पूर्व विधायकों को पेंशन दिया ही क्‍यों जाता है। राजनीति जब धंधा हो गया है, पैसा लगाओ, पैसा कमाओ तो फिर पेंशन क्‍यों। अब संसद या विधानमंडलों को विधायिका भी नहीं कहा जाना चाहिए। क्‍योंकि उसने कानून बनाने का अपना अधिकार खो दिया है। अब किसी विधेयक पर सदन में बहस नहीं होती है। बिना बहस के कानून बनते हैं। बहस के नाम पर पार्टी के नेता का मौखिक परिक्रमा होता है। बिहार में विधेयक पास करवाने के लिए मार्च, 2021 में पुलिस बल इस्‍तेमाल किया गया।

विधायकों के लिए पेंशन का निर्धारण इस संदर्भ में किया गया होगा कि उनकी एक सामाजिक जिम्‍मेवारी होती है, राजनीतिक दायित्‍व होता है। लेकिन, अब न उनकी कोई सामाजिक जिम्‍मेवारी है और न कोई राजनीतिक दायित्‍व। उनका काम सिर्फ हां या ना कहने भर का रह गया है, तब फिर भूतपूर्व का बोझ जनता क्‍यों ढोये। अगर सरकार को लगता है कि भूतपूर्व विधायकों की कोई जिम्‍मेवारी है तो पेंशन की हदबंदी (सीलिंग) की जानी चाहिए। विधायकी की अवधि के आधार पर पेंशन का निर्धारण अनैतिक है। इसका विरोध खुद पूर्व विधायकों को करना चाहिए-राज्‍य के हित में, जनता के हित में।

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