जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
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13 नवम्बर 2022

भागलपुर : पूर्वी बिहार और कोसी-सीमांचल की हवा पर प्रदूषण की नजर लग चुकी है। भागलपुर की हवा में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है तो किशनगंज, कटिहार व सहरसा जिले की हवा में प्रदूषण इतना घुल चुका है कि इस माहौल में रह रहे लोगों की सांसों में अब प्रदूषण घुल रहा है। गनीमत यह है कि अभी कोहरा नहीं है, नहीं तो पूर्वी बिहार व कोसी-सीमांचल में स्मॉग का कहर होता। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिहार द्वारा पूर्वी बिहार के 13 जिलों में अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, मुंगेर, भागलपुर व सहरसा में वायु गुणवत्ता को मापने के लिए स्टेशन बनाए गये हैं।

इन जिलो में जहां किशनगंज जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 181 रहा, जो कि राहत की बात है लेकिन, वहीं इन जिलों में सबसे ज्यादा 358-358 एक्यूआई पूर्णिया व सहरसा जिले का रहा। वहीं, बांका, जमुई, लखीसराय, मधेपुरा व खगड़िया जिले में सीपीसीबी बिहार द्वारा मॉनिटरिंग स्टेशन नहीं होने के कारण यहां की हवाओं की सेहत को नहीं जांचा जा सका। लेकिन जिस तरह से इन जिलों के आसपास हवाओं की सेहत खराब है, ऐसे में आशंका है कि इन जिलों में हवाओं की सेहत खराब ही होगी।

एक्यूआई 200 के पार तो सेहत को खतरा : जवाहरलाल नेहरू ने मेडिकल कॉलेज सह मायागंज अस्पताल के टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ० शांतनु कुमार घोष कहते हैं कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) यदि 200 को पार कर जाये और इस माहौल में कोई व्यक्ति बिना मास्क लगाये दिनभर घर से बाहर रह जाता है तो उसके अंदर 10 से 12 सिगरेट पीने जितना धुंआ चला जाएगा, जो कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बनता है। वहीं, इस दौरान घर से बाहर रहने वाले लोग विशेषकर एलर्जी,अस्थमा व टीबी के मरीजों को सांस लेने में हल्की दिक्कत और आंखों में जलन महसूस हो सकती है।

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