जनपथ न्यूज डेस्क

Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
10 अक्टूबर 2022

भागलपुर : नगर निकाय चुनाव स्थगित करने के फैसले के बाद सारे निकाय कार्यपालक पदाधिकारियो के हवाले स्वाभाविक रूप से हो गए पर यह व्यवस्था भी छह महीने तक ही रहेगी। इसके बाद फिर चुनावी प्रक्रिया आरम्भ करना है.तबतक अतिपिछड़ी या पिछड़ी जातियों का आरक्षण का मसला सुलझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है। ऐसे में अगला एक निकाय चुनाव बिना आरक्षण के सामान्य चुनाव कराना मजबूरी होगी। यह पहला मौका होगा जब बिन आरक्षण का चुनाव होगा, जानकारों का मानना है। पटना हाईकोर्ट ने न तो चुनाव पर रोक लगाया है, न अत्यंत पिछड़ी जाति को आरक्षण दिए जाने को नकारा है और न ही उसने अतिपिछड़ी जातियों को आयोग बना नोटिफाई करने को कहा है। हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में यह फैसला सुनाया है कि राज्य सरकार भले ही इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है पर जानकार मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले को उलटकर बिहार सरकार के पक्ष में उनकी दलीलों को सुन फैसला सुनाएगी। फिर महाराष्ट्र या अन्य राज्यों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश का पालन कर नगर निकाय का चुनाव कराया गया। बिहार सरकार को आयोग गठित कर अत्यंत पिछड़ी जातियों को अधिसूचित करना और फिर चुनाव कराना होगा।
यह उतना सरल नहीं है, क्योंकि वोट के फायदे के लिये कई जातियों को नए तरीके से अत्यंत पिछड़ी जाति में शामिल कर लिया गया है, जिसके कारण पूर्व से चले आ रहे अत्यंत पिछड़ी जातियों का पूरा लाभ नए जुड़े लोग उठा रहे हैं। खासकर तेली जैसे साधन सम्पन जाति को अत्यंत पिछड़ी जाति में जोड़ने के बाद त्रिस्तरीय पंचायत नगर निकाय या नौकरियों अन्य स्थानों पर इस जाति का वर्चस्व हो गया है। बिहार में 7 जिला परिषद अध्यक्ष से लेकर अधिकांश मुखिया प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया, ऐसे में अन्य अत्यंत पिछड़ी जातियों की जबरदस्त हकमारी होने लगी है। अगर आयोग गठित हुई तो सम्भव है कि तेली जाति को अत्यंत पिछड़ी जाति की सूची से बाहर कर सकती है। वैसे इस जाति को अत्यंत पिछड़ी जाति को शामिल करने के विरुद्ध कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं दायर है। आयोग को अन्य कई सम्पन्न जातियों को भी बाहर का रास्ता दिखाना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया जल्दी में भी हुई तो सालभर तो लग ही सकता है। ऐसे में अगले छह महीने के बाद वाला चुनाव बिना आरक्षण के कराने की ही सूरत बनती दिखाई दे रही है।

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