जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना/भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
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3 नवम्बर 2022

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को राजनीति करते हुए आधी सदी गुजर गई। संभवतः 1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव चुने गए थे। संयोग है कि उसी वर्ष लालू प्रसाद यादव उसी छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे। लालू प्रसाद यादव से सुशील मोदी का राजनीतिक टकराव स्वभाविक था। दोनों दो विपरीत विचारधाराओं के संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। तब से अब तक लालू प्रसाद से सुशील मोदी का टकराव लगातार जारी रहा है।

लेकिन दोनों की राजनीतिक हैसियत में बहुत बड़ा फ़ासला है। इतना सबकुछ के बावजूद लालू प्रसाद यादव आज भी राष्ट्रीय राजनीति में दखल रखते हैं। लेकिन सुशील मोदी का दुर्भाग्य यह है कि बिहार की राजनीति में इतने दिनों बाद भी वे तीसरे स्थान से उपर नहीं चढ़ पाए।

इस बीच सुशील कुमार मोदी के लिए राजनीतिक स्थिति और अपमान जनक हो गई है। लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव, जिनकी उम्र बत्तीस- तेंतीस वर्ष है की राजनीतिक हैसियत आधी सदी से राजनीति के अखाड़े में पसीना बहाने वाले सुशील कुमार मोदी से उपर हो गई है। विधायकों की संख्या और वोट के प्रतिशत के हिसाब से बिहार की सबसे बड़ी पार्टी के वे स्वभाविक नेता हो गए हैं। स्वभाविक इसलिए कि विधानसभा के पिछले चुनाव में तेजस्वी यादव ने न सिर्फ़ अपनी पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व किया बल्कि संपूर्ण गठबंधन का स्वभाविक नेतृत्व भी उनके ही कंधों पर था. परिणाम सबके सामने है।

इससे सुशील कुमार मोदी की मनःस्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। हमारे समाज में जिस प्रकार पुण्य हीन, लाचार और बेबस पुरनिया खीज में श्राप देता है। आज वही स्थिति सुशील कुमार मोदी की हो गई है। आधी सदी तक बाप से लड़ते- लड़ते बिहार की राजनीति में सुशील मोदी की राजनीतिक हैसियत तीन नम्बर से उपर नहीं पहुँच पाई ! आज बेबस और लाचार वही सुशील कुमार मोदी तेजस्वी यादव को जेल जाने का श्राप दे रहे हैं। लेकिन श्राप भी उसी का फलता है, जिसमें पुण्य की ताक़त होती है।

सुशील कुमार मोदी की इस अपमान जनक स्थिति को देखकर पीड़ा होती है। लंबे अरसे तक उन्होंने अच्छे लोगों के साथ काम किया है और एक तो वे हमारे वैश्य समुदाय से आते हैं, दुसरा कि वे हमारे भागलपुर के सांसद भी रह चुके हैं, इस नाते वे हमारे अभिभावक तुल्य हैं,इसलिए सुशील मोदी को मेरी पुत्रवत् राय होगी। राजनीति की मुख्य धारा से अलग राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कई क्षेत्रों में काम है। उन्हीं में से किसी एक क्षेत्र को चुनकर सुशील जी राजनीति की सक्रिय धारा से किनारे हो जाएं

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