जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
14 जनवरी 2023

भागलपुर : बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर रामचरितमानस पर बयान देकर विपक्ष के साथ अपनों की आलोचना का शिकार हो रहे हैं। सीएम नीतीश को मीडिया से उनके बयान के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि वह मंत्री से इसके बारे में बात करेंगे। जेडीयू ने तो इस पर साफ किनारा कर लिया है। तेजस्वी यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने सीएम नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव को भी ट्वीट कर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। इस बीच आरजेडी के उपाध्यक्ष वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया के हवाले से बताया है कि रामचरित मानस के प्रति वे कितने आग्रही थे।

*लोहिया ने कहा था- ‘हे भारत माता! हमें राम का कर्म और वचन दो’*

शिवानंद तिवारी ने बताया कि समाजवादी आंदोलन के जनक डॉ राम मनोहर लोहिया ने राम और रामायण मेले के आयोजन को लेकर सर्वाधिक लेख लिखे हैं। लोहिया सभी भाषाओं में उपलब्ध रामायण के प्रशंसक हैं पर उनका मन तुलसी के रामायण में रमा हुआ है। तुलसी की रामायण में आनंद के साथ-साथ धर्म भी जुड़ा हुआ है। तुलसी की कविता से निकलने वाली अनगिनत उक्तियां और कहावतें, जो आदमी को टिकाती हैं और सीधे रखती हैं। तुलसी एक रक्षक कवि हैं। जब चारों तरफ से अभेद हमले हों तो बचाना, थामना, टेक देना शायद ही तुलसी से बढ़कर कोई कर सकता है। वाल्मीकि और दूसरे रामायण में प्रेम को इतनी बड़ी जगह नहीं मिली, जितनी की तुलसी की रामायण में। अपने प्रसिद्ध लेख राम कृष्ण और शिव के समापन में डॉक्टर लोहिया लिखते हैं- ‘हे-भारत माता! हमें कृष्ण का हृदय दो और राम का कर्म और वचन दो’। लोहिया के कथन को उद्धृत कर शिवानंद ने साफ कर दिया कि वह भी लोहिया की तरह राम, रामचरित मानस और तुलसी के प्रशंसक हैं। एक तरह से शिवानंद ने चंद्रशेखर के रामचरित मानस पर दिए बयान पर अपनी असहमति जताई है।

*नीतीश को नहीं मालूम, चंद्रशेखर ने क्या कहा*

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो चंद्रशेखर के बयान के बारे में जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, उनकी पार्टी जेडीयू ने प्रतिक्रिया जारी कर दी है। जेडीयू ने कहा कि सरकार में शामिल सभी नेताओं को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत न हो। ऐसे विवादित बयान न दें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान पर नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। अलबत्ता उन्होंने यह जरूर कहा है कि मंत्री से इस पर बात करेंगे।

*चंद्रशेखर झुकने को तैयार नहीं,अपने बयान पर अड़े*

प्रो.चंद्रशेखर ने कहा कि रामचरितमानस पर दिए बयान पर वह कायम हैं।रामचरितमानस में में 5-6 दोहे ऐसे हैं, जिनका विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन दोहों पर उन्हें घोर आपत्ति है। उन्होंने सफाई देने के अंदाज में कहा कि हिन्दू धर्मग्रंथों पर कई साल से वैचारिक संघर्ष चल रहा है। आरजेडी नेता ने दोहराया कि रामचरितमानस समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। समाज में पिछड़ों, महिलाओं और दलितों को शिक्षा हासिल करने से यह रोकता है। उन्हें बराबरी का हक देने से भी मना करता है। उनकी जीभ काटकर लाने वाले को इनाम की घोषणा पर उन्होंने कहा कि मनुस्मृति लिखने वाले तो फतवा जारी करेंगे ही। उनके ही बारे में तो लिखा है मनुस्मृति में कि जो शुक्र वेद पढ़े, उसकी जीभ काट लो। उन्होंने यह भी कहा कि वह संपूर्ण रामचरितमानस का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि उसके कुछ अंश पर उनको आपत्ति है।

*चिराग का तंज- जो खुद बंटवारे की राजनीति करे, उसके मंत्री से क्या उम्मीद कैसी!*

एलजेपी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जमुई सांसद चिराग पासवान ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रदेश है, जहां के सीएम खुद बंटवारे की राजनीति करते हैं। ऐसे में उनके मंत्री से क्या उम्मीद की जा सकती है। बंटवारे की राजनीति करके ही नीतीश कुमार कई साल से बिहार के सीएम हैं। दलित को महादलित में बांटना, पिछड़ा को अतिपिछड़ा में बांट देना और कभी अगड़ा तो कभी पिछड़ा की राजनीति करना ही नीतीश कुमार का काम है। ऐसे में उनके मंत्री से क्या उम्मीद की जा सकती है?

*दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया चंद्रशेखर के खिलाफ मामला*

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत की है। विनीत जिंदल का कहना है कि साजिश के तहत बिहार के शिक्षा मंत्री ने रामचरितमानस पर अभद्र टिप्पणी की है। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि बिहार के चंद्रशेखर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। धार्मिक भावना को आहत करने और जाति के नाम पर समाज को बांटने की धाराओं में मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

*पहले भी ऊटपटांग बोलते रहे हैं शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर*

शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने 24 दिसंबर 2022 को भी एक सरकारी कार्यक्रम में हिन्दू धर्मग्रंथों के बारे में ऐसा ही ऊटपटांग बयान दिया था। सरकारी लेक्चरर्स की ट्रेनिंग पूरा होने पर पटना के ज्ञान भवन में आयोजित सरकारी कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे चंद्रशेखर ने हिन्दू धर्म ग्रंथों के खिलाफ खूब बोले थे। उन्होंने कहा था कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में 85 फीसदी लोगों को गालियां दी गई हैं। उसी दिन हुए नैक के एक कार्यक्रम में भी चंद्रशेखर ने हिन्दू धर्म ग्रंथों पर निशाना साधा था। वह अपने हर सरकारी कार्यक्रम में हिन्दू धर्म ग्रंथों की आलोचना करने से नहीं चूकते।

*तेजस्वी यादव की चुप्पी के क्या हैं मायने*

प्रोफेसर चंद्रशेखर बयान पर बिहार ही नहीं, पूरे देश में घमासान मचा है। विपक्षी दल हमलावर हैं। महागठबंधन सरकार के मुखिया ने मंत्री से बात का करने का भरोसा दिया है। उनकी पार्टी ने ऐसे बयान से परहेज करने की बात कही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी से अपने मंत्री के बयान पर रुख स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। इधर तेजस्वी यादव ने चुप्पी साध ली है। वह या तो इस तरह के बयान से होने वाली किरिकरी से खफा हैं या फिर उनकी इस पर मौन सहमति है। उनके रुख का हर किसी को इंतजार है।

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