नीतीश का साथ छोड़ना भाजपा के लिए बना वरदान, 2024-2025 तक असर पड़ना तय

जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
2 जनवरी 2023

भागलपुर : बिहार के भागलपुर जिले का निकाय चुनाव राजनीतिक झंडे के साथ नहीं लड़ा जा रहा था लेकिन, राजनीतिक पार्टियों की भागीदारी पर्दे के पीछे से जबर्दस्त दिखी। कुढ़नी उपचुनाव में महागठबंधन की हार हुई और भाजपा का अतिपिछड़ा कार्ड सुपरहिट रहा था। निकाय चुनाव के दूसरे फेज के परिणाम ने भी महागठबंधन को फेल किया और बताया कि शहरी इलाकों में भाजपा का जनाधार मजबूत है। 17 नगर निगमों में से भाजपा और महागठबंधन की ताकत समान दिखना इसका स्पष्ट संकेत है।

राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने लालू प्रसाद की मौजूदगी में राजद राज्य परिषद की 21 सितंबर को पटना में हुई और बैठक में ही कह दिया था कि राजद और जदयू कार्यकर्ताओं के दिल आपस में नहीं मिले हैं। इस बात को उन्होंने बड़े चैलेंज के रुप में बताया था। निकाय चुनाव ने उनकी बात को सही साबित कर दिया है। इस चुनाव का असर 2024 और 2025 के चुनावों में पड़ना तय है।

अतिपिछड़ों ने कुढ़नी की तरह भागलपुर में भी नीतीश का साथ छोड़ा : भागलपुर की नई मेयर डाॅ० बसुंधरा लाल और नए डिप्टी मेयर डाॅ० सलाऊद्दीन अहसन बने हैं। महागठबंधन की तीन पार्टियों ने अलग-अलग उम्मीदवार देकर भाजपा की उम्मीदवार डाॅ० बसुंधरा लाल को हराने की कोशिश में कोई कमी नहीं की।

सुलतानगंज विस से कभी राजद से चुनाव लड़ने का मन बना चुके भागलपुर जिप अध्यक्ष टुनटुन साह की पत्नी सह निवर्तमान मेयर सीमा साह, कांग्रेस समर्थक सोईन अंसारी की पत्नी गजाला परवीन व जदयू विधायक की पत्नी सविता देवी आदि ने खूब वोट काटे, लेकिन भागलपुर की विवेकशील मतदाता के आगे राजद-जदयू व कांग्रेस चित हो गए। यह इस बात का संकेत है कि यादव वोट बैंक और मुसलमान वोट बैंक भले महागठबंधन के साथ रहा, लेकिन अतिपिछड़ा वोट बैंक ने कुढ़नी की तरह भागलपुर में भी नीतीश कुमार का साथ छोड़ दिया।

हालांकि, इस दौरान भाजपा की लहर का लाभ लेने के लिए असली व नकली भाजपाई का यहां पर खेल खेला गया और निवर्तमान मेयर सीमा साह के पक्ष में कई भाजपाई चेहरों ने दिन-रात साथ रहकर यह साबित करने की कोशिश की असली भाजपाई प्रत्याशी सीमा साह ही हैं, लेकिन राजद समर्थित डिप्टी मेयर के साथ इस सीमा साह के द्वारा हाथ मिलाते ही उनका असली चेहरा सामने आ गया और आम जनता को सबकुछ समझ में आ गया। इस असली-नकली के खेल में जिला स्थित वोट के ठेकेदारों की खूब चांदी रही।
यहां पर बड़ी बात यह है कि राजद नेता तेजस्वी यादव को लेकर जैसी हवा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बनाई है और बार-बार उनकी तरफ इशारा करते हुए कह रहे हैं कि आगे इन्हीं को देखना है। उसका कोई असर भागलपुर में मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर नहीं दिखा।

महागठंधन के लोग जीतने से ज्य़ादा भाजपा को हराने के लिए लड़ते रहे : तेजस्वी यादव लगातार नौकरी देने, रोजगार देने की बात कर रहे हैं। लेकिन भागलपुर की जागरूक जनता ने इन वायदों को दरकिनार कर दिया। बहुसंख्यक हिन्दुओं ने भाजपा के पक्ष में अपनी एकजुटता दिखाई। वोटों के अंतर से आपको भविष्य की राजनीति का आभास हो जाएगा। भागलपुर से मेयर बनने वाली डाॅ० बसुंधरा लाल को 53 हजार 593 वोट मिले। कांग्रेस समर्थित गजाला परवीन को 43 हजार 117 वोट मिले। राजद से हाथ मिलाकर भाजपा का मुखौटे वाले जिप अध्यक्ष टुनटुन साह की पत्नी सीमा साह को 24 हजार 702 वोट मिले। वहीं, एक और राजद समर्थित श्वेता प्रियदर्शनी 5 हजार 549, जाप समर्थित अमृता राज 6 हजार 898, जदयू समर्थित खुश्बू कुमारी 9 हजार 811 तो जदयू विधायक की पत्नी सविता देवी महज 7 हजार 115 वोट लाकर भागलपुर शहरी क्षेत्र में सीएम नीतीश के बजूद को साबित कर दिया।

महागठबंधन की स्ट्रेटजी यह थी कि वोटों को बांटा जाए, ताकि भाजपा समर्थित डाॅ० बसुंधरा लाल हार जाए। ऐसा लगता है कि महागबंधन जीतने के लिए चुनाव ही नहीं लड़ रहा है। यदि वह जीतने के लिए लड़ती तो किसी एक उम्मीदवार को सहमति के साथ उतारती। लेकिन यहां तो भाजपा को हराना सबसे बड़ा काम माना जा रहा था। इस लक्ष्य के चक्कर में हालत यह हुई कि महागठबंधन समर्थित मेयर पद के सभी उम्मीदवारों में दो ने तो बढ़िया वोट लाया, लेकिन अंततः एक-दूसरे को ही लेकर सभी डूब गए।

2024-25 की झांकी के रुप में इसको लेना चाहिए : ऐसी हालात में मेरी समझ यह मानती है कि अब गांवों का मीडिल क्लास शहर में रह रहा है और वह अपने गांव आता-जाता भी रहता है। नगर निकाय रिजल्ट से यह बात सामने आई है कि महागठबंधन बनाकर सेकुलर पार्टियां 2024 और 2025 का ख्वाब बना रहे हैं और गणित का सिद्धांत लागू कर रहे हैं। महागठबंधन के बारे में आम धारणा बनती जा रही है कि यह ज्यादा जोगी मठ उजाड़ हो रहा है और इसे भाजपा वरदान के रुप में ले रही है।

नीतीश की उपस्थिति भाजपा के लिए कष्टप्रद हो गई थी। नगरीय वोट बताता है कि भाजपा बहुत आगे है महागठबंधन से।

2024-25 की झांकी के रूप में इसको लेना चाहिए। ख्वाब में डूबे रहने का अधिकार सभी को है। हमारे जैसे समाजवादी पत्रकार लोग देख रहे हैं कि महागठबंधन के बड़े नेता भाजपा का रास्ता मजबूत कर रहे हैं। महागठबंधन में ऑपरेशन की जरूरत है लेकिन यह संभव नहीं है।

यह जीत ज्यादा ताकतवर है, सीधे जनता की जीत : मेरा मानना है कि शिवानंद तिवारी की कही बातों में न केवल दम है बल्कि वह सही भी है, जदयू और राजद के कार्यकर्ताओं के दिल नहीं मिल पा रहे हैं। बिहार के भविष्य की राजनीति किस ओर जा रही है, यह निकाय चुनाव इसका संकेत है।

पिछड़ा-अतिपिछड़ा वोट भाजपा के साथ हो गया है और बहुत ज्यादा मुस्लिम तुष्टीकरण महागठबंधन के लिए भारी पड़ता जा रहा है। इस बार तो भागलपुर मेयर या डिप्टी मेयर की जीत जनता के सीधे मतदान की जीत है इसलिए यह ज्यादा ताकतवर है।

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