जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना/भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
1 जनवरी 2022

मैं न कांग्रेस के खिलाफ हूं और न ही पंडित नेहरू के खिलाफ, हमारे देश की राजनीति देश को जोड़ने की होनी चाहिए न कि गृहयुद्ध पैदा करने की। आज जो लोग केवल धर्म और जाति के नाम पर वोट ले रहे हैं, उनसे हम रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा का सवाल तो पूछें। हमको वो राजनीति नहीं करनी, जो लोगों को दबाए बल्कि हमको वह राजनीति करनी है, जो लोगों को उठाए।

भाजपा सांसद वरुण गांधी के कहे ये शब्द इनदिनों वायरल हो रहा है। विदित हो कि वरुण गांधी का एक वीडियो तेजी से वायरल होता दिख रहा है, जिसमें वह अपनी सरकार पर सवाल खड़े करते दिख रहे हैं। हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है, जब उन्होंने अपनी ही पार्टी या सरकार पर सवाल उठाए हैं तो फिर इस बार अलग क्या है। इसको समझने के लिए वरुण गांधी के चचेरे भाई और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों पर गौर करने की जरूरत है। अभी हाल ही में दिल्ली में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी के भाषण में भी ऐसी ही बात सुनने को मिली थी। वरुण गांधी की टिप्पणी और उनके बड़े चचेरे भाई राहुल गांधी के भाषण के बीच राजनीतिक समानता दिखाई दे रही है। क्या वरुण गांधी भी वैसी ही बात करने लगे हैं, जैसे उनके चचेरे भाई राहुल गांधी करते हैं। वरुण गांधी के हालिया बयान के बाद उनके वापस कांग्रेस में भी लौटने की अटकलें लगाईं जा रही है। इसको लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से सवाल भी पूछे गए।

नफरत नहीं प्यार… राहुल वाली भाषा बोलने लगे हैं वरुण : भाजपा सांसद वरुण गांधी काफी समय से नरेंद्र मोदी सरकार के कई नीतिगत फैसलों के आलोचक रहे हैं। किसान आंदोलन के वक्त भी उनका अलग स्टैंड था। हाल ही में वह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं, जब उन्होंने हिंदू-मुस्लिम राजनीति के खिलाफ बात की। एक वीडियो में वह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि ताकत वह होती है, जो लोगों को उठाए न कि दबाए। हिंदू- मुस्लिम भाई को बांटों, भाई को काटो ये राजनीति नहीं होने देंगे। हमारे देश की राजनीति देश को जोड़ने वाली होनी चाहिए, न कि गृहयुद्ध कराने की राजनीति। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अभी लाल किले से कहा कि 24 घंटे हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाई जा रही है। जबकि देश की हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आपके ध्यान को हटाने के लिए किया जा रहा है, ये 24 घंटा करते हैं.किसानों, मजदूरों का पैसा दूसरों के जेब में डाला जा रहा है। वरुण गांधी के इस वीडियो के बाद चर्चा यह शुरू है कि क्या वह कांग्रेस में आएंगे।

वरुण के कांग्रेस में आने के सवाल पर राहुल ने दिया जवाब : शनिवार को राहुल गांधी से यह पूछा गया कि क्या कांग्रेस में वरुण गांधी के लिए जगह है? इस पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष से यह पूछना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या जनवरी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गुजरने वाली भारत जोड़ो यात्रा में वरुण गांधी का स्वागत होगा ?इसपर राहुल गांधी ने कहा कि स्वागत तो किसी का भी हो सकता है, लेकिन वो भाजपा के हैं तो शायद उनको दिक्कत होगी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर अंडरकरंट होने का दावा किया और कहा कि देश को वैकल्पिक दृष्टिकोण देने के लिए विपक्ष को एकजुट होना होगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के कांग्रेस-भाजपा के एक होने संबंधी बयान को लेकर उन पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि देश की राजनीति में भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक धुरी कांग्रेस है और वह इस वैचारिक लड़ाई में निश्चित रुप से जीत हासिल करेगी।

कद घटा, काफी समय से बगावती मूड में हैं वरुण : वरुण गांधी भाजपा में साल 2004 में शामिल हुए थे, उस वक्त भाजपा के मुख्य रणनीतिकार और पार्टी के बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी का उन्हें पूरा समर्थन था। जब भाजपा की कमान राजनाथ सिंह के हाथ में थी, उस वक्त का पार्टी में उनका कद ठीक था। वह पार्टी महासचिव और बंगाल के प्रभारी भी थे। अमित शाह के कार्यकाल के दौरान वरुण गांधी को महासचिव से हटा दिया गया। पिछले साल उनको राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी जगह नहीं मिली। हालांकि, वरुण गांधी भी काफी समय से अपनी ही सरकार के खिलाफ सवाल उठाते रहे हैं। वह प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र सरकार के कई फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। किसान आंदोलन के वक्त भी यह देखने में आया था। किसानों के प्रदर्शन को लेकर कई बार वह अपना असंतोष जाहिर कर चुके हैं। लखीमपुर खीरी की घटना के वक्त भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। अब एक बार फिर वह इस कड़ी में और कड़े तेवर के साथ बढ़े हैं, जिसके बाद 2024 से पहले एक नए समीकरण की चर्चा जोर पकड़ ली है।

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