जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना/भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
30 दिसंबर 2022

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की राह पर चलना शुरू कर दिया है। अब वे केंद्र से टकराव के मूड में नहीं दिखतीं। इसके उलट बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र से अब तक अपनी नाराजगी का इजहार करने में ही लगे हैं। हालांकि तीनों मुख्यमंत्री क्षेत्रीय दलों के नेता हैं। नवीन पटनायक 2023 में अब तक के सर्वाधिक समय 23 साल तक पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सकार के नेता बतौर सीएम रहने वाले ज्योति बसु का रिकार्ड तोड़ेंगे। दूसरे सर्वाधिक कार्यकाल वाले बिहार के सीएम नीतीश कुमार होंगे, जिन्होंने कुछ महीने छोड़ कर तकरीबन 17 साल लगातार इस पद पर गुजार दिये। ममता बनर्जी तीसरी बार 2021 में सीएम बनी हैं।

नवीन, ममता और नीतीश में एक बात आम है कि कभी न कभी ये भाजपा के साथ रहे। नवीन पटनायक एक बार तो नीतीश कुमार तीन बार भाजपा से हाथ मिलाकर सीएम बने, लेकिन ममता बनर्जी ने अपने दम पर अकेले वाम मोर्चा शासन का अंत किया। फिलवक्त तीनों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है, लेकिन भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार से रिश्तों की बात करें तो नवीन पटनायक की कभी कोई उल्लेखनीय अनबन अब तक नहीं हुई। उनकी अनबन तो कांग्रेसनीत केंद्र की यूपीए सरकार से भी कभी नहीं रही। उन्हें जरूरत की सारी सहूलियतें केंद्र से मिलती भी रहीं।

ममता का मन बदल गया, लेकिन नीतीश की अकड़ कायम : ममता बनर्जी भी 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद तक भले भाजपा, खासकर पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से नाराजगी जाहिर करती रहीं, लेकिन अब उनका मन-मिजाज भी बदल चुका है। अब वो बात-बात पर केंद्र से टकराव के मूड में नहीं हैं। इसके दो हालिया उदाहरण काफी हैं.हाल ही में जी-20 को लेकर होने वाली पीएम मोदी की बैठक में ममता ने शिरकत कीं और 30 दिसंबर को होने वाली राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में भी वो पीएम मोदी के साथ दिखेंगी।

केंद्र से टकराव टालने की दिशा में इसी महीने कोलकाता में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई ईस्टर्न जोनल काउंसिल की बैठक में भी वो शामिल थीं। सौहार्द्र का आलम ये है कि असेंबली इलेक्शन में चले तीखे शब्दवाण के दर्द को भुला कर उन्होंने अमित शाह का अपने दफ्तर में स्वागत भी किया। इसके ठीक उलट हाल ही में भाजपा से रिश्ता तोड़ राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार ने इन दोनों बैठकों से किनारा कर लिया। अमित शाह के साथ बैठक में राजद नेता और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को उन्होंने भेजा था.पीएम की बैठक में भी वे तेजस्वी यादव को ही भेज रहे हैं।

नवीन पटनायक नये साल में ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ेंगे : क्षेत्रीय दलों में बीजू जनता दल (बीजद) के नेता नवीन पटनायक मार्च 2023 में बतौर मुख्यमंत्री ज्योति बसु के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे। ज्योति बसु 1977 से 2000 तक लगातार 23 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। नवीन पटनायक ने 2000 में ओडिशा के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। उसी साल ज्योति बसु के उत्तराधिकारी के रूप में बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने थे। तब ज्योति बसु की उम्र 86 साल हो रही थी और वे उम्रजनित स्वास्थ्य की परेशानियों से जकड़ने लगे थे। ज्योति बसु के कार्यकाल को लेकर ये माना गया था कि उनका रिकॉर्ड शायद ही कोई तोड़ पाये। लेकिन नवीन पटनायक न केवल ज्योति बसु के रिकॉर्ड की बराबरी करने जा रहे हैं, बल्कि उससे आगे निकलने के रास्ते पर भी हैं। 77 साल के पटनायक ने अपना आखिरी चुनाव 2019 में जीता था। उनका कार्यकाल 2024 में पूरा होगा। उनके कार्यकाल की खासियत ये रही कि केंद्र से बिना टकराये वे सारी मदद लेते रहे और चुपचाप अपने राज्य के विकास में जुटे रहे।

नरेंद्र मोदी से क्यों मुंह चुराते रहे हैं सीएम नीतीश कुमार : पीएम मोदी से नीतीश कुमार की नाराजगी नई नहीं है। बिहार में बाढ़ राहत के लिए गुजरात का सीएम रहते नरेंद्र मोदी ने जब राहत राशि भेजी थी तो नीतीश कुमार ने लौटा दी थी। गुजरात दंगों के लिए वे मोदी को जिम्मेवार मानते थे और इसी वजह से उनकी मदद वापस कर दी थी। बिहार में भाजपा के साथ सरकार चलाते रहने के बावजूद उन्होंने साफ कर दिया था कि भाजपा के लिए बिहार में चुनाव प्रचार के लिए भाजपा के दूसरे नेता भले आयें, पर नरेंद्र मोदी को बिहार की धरती पर पैर नहीं रखने देंगे। एक बार तो नरेंद्र मोदी के साथ आयोजित भोज का कार्यक्रम भी उन्होंने ऐन वक्त पर रद्द कर दिया था। नरेंद्र मोदी से नीतीश की नफरत का चरम तब आया, जब भाजपा ने गोवा अधिवेशन में 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को पीएम फेस घोषित किया। नीतीश ने तब भाजपा से कुट्टी कर ली थी। हालांकि, कभी भाजपा तो कभी राजद के साथ नीतीश का आना-जाना लगा रहता है। पीएम बनने के बाद मोदी से उनकी मुलाकातें भी हुई हैं। इस बार भाजपा से अलग होने के बाद उन्होंने फिर मोदी से आंख चुराना शुरू कर दिया है।

कहीं तेजस्वी को प्रमोट करने का ये अंदाज तो नहीं है: नीतीश कुमार कह चुके हैं कि अब बिहार को आगे बढ़ाने का काम तेजस्वी यादव ही करेंगे। 2025 का विधानसभा चुनाव महागठबंधन तेजस्वी के नेतृत्व में ही लड़ेगा। संभव है कि ऐसी महत्वपूर्ण बैठकों में उन्हें भेज कर नीतीश उनको प्रमोट करना चाहते हों। हालांकि, जिस तरह राजद की ओर से तेजस्वी के लिए सिंहासन खाली करने का दबाव नीतीश पर पड़ रहा है, संभव है कि ऐसे आयोजनों में तेजस्वी को भेज कर वो विश्वास दिलाना चाहते हों कि सब तो तेजस्वी ही कर रहे हैं।
कयास तो ये भी लगाये जा रहे हैं कि नये साल में नीतीश को कुर्सी छोड़ने के लिए राजद ने बाध्य किया तो वो फिर भाजपा के शरणागत होने का भय दिखाएंगे इससे भी बात नहीं बनी तो वो एक बार फिर पाला बदल सकते हैं। चुनावी रणनीतिकार और कभी जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे प्रशांत किशोर तो दावे के साथ कहते हैं कि नीतीश एक बार और पलटी मारेंगे। अब भी भाजपा से संबंध जोड़े रखने के लिए उन्होंने अपने दूत छोड़ रखे हैं। इस क्रम में वो जदयू के राज्यसभा सदस्य हरिवंश का नाम भी गिनाते हैं, जो जदयू के भाजपा से अलग होने के बावजूद राज्यसभा के उपसभापति पद पर बने हुए हैं।

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