और भाजपा का तंज- 2014 के मुंगेर लोस चुनाव की कुंठा तो नहीं ?

जनपथ न्यूज डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
www.janpathnews.com
7 दिसंबर 2022

भागलपुर/पटना : भूमिहार समाज से आने वाले दो नेताओं को सोमवार को बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। ललन सिंह जहां एक बार फिर से सत्ताधारी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किये गए। वहीं, कांग्रेस आलाकमान ने डॉ० अखिलेश प्रसाद सिंह को बिहार प्रदेश की जिम्मेदारी दी है। ललन सिंह को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष व अखिलेश सिंह को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए जाने के बाद जातिगत राजनीति तेज हो गई है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा है कि राजनीति तो भूमिहारों की देखिए। उस समाज के नेता पार्टी के सर्वेसर्वा बन रहे हैं, जबकि अन्य लोग जिलाध्यक्ष बनकर ही खुश हो गए हैं। जदयू नेता के इस बयान पर भाजपा ने भी चुटकी ली है।

*राजनीति तो भूमिहारों की देखिए*

बिहार की सत्ताधारी जदयू के प्रदेश प्रवक्ता प्रगति मेहता ने सोशल मीडिया पर अपनी बात को साझा किया है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि- जलन का भाव मत परखिए, लेकिन राजनीति भूमिहारों की देखिये, आप जिलाध्यक्ष बनकर खुश हैं, वो पार्टी के सर्वेसर्वा अध्यक्ष बन रहे हैं। वैसे तो प्रगति मेहता ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। लेकिन संदर्भ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह और अपने दल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को लेकर ही है। वैसे उन्होंने सोशल मीडिया पर बधाई दी है लेकिन यह भी बताने की कोशिश किया है कि भूमिहार समाज के लोग पार्टी के सर्वेसर्वा बन रहे और (अपना समाज) जिलाध्यक्ष बनकर ही खुश है।

*भाजपा ने कसा तंज*

भूमिहार समाज से आने वाले ललन सिंह को जदयू का फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किये जाने के कुछ घंटे बाद ही पार्टी के एक प्रवक्ता का जातिगत दृष्टिकोण से बयान आने पर भाजपा ने भी चुटकी ली है। बिहार भाजपा के प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने कहा है कि प्रगति मेहता जी की तकलीफ स्वभाविक है, क्योंकि जदयू में ‘अति-पिछड़े’ सिर्फ झोला-झंडा उठाने के लिए ही हैं। प्रगति जी को दिक्कत राष्ट्रीय अध्यक्ष के भूमिहार होने से नहीं पर ‘अति-पिछड़ों’ की पार्टी में घोर उपेक्षा से है। वैसे 2014 के मुंगेर लोकसभा चुनाव वाली कुंठा तो नहीं प्रगति भाई?

विदित हो कि 2014 में मुंगेर लोकसभा चुनाव में प्रगति मेहता और ललन सिंह दोनों उम्मीदवार थे। प्रगति जहां राजद के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे थे, वहीं ललन सिंह जदयू के उम्मीदवार थे। लेकिन दोनों की करारी हार हो गई थी। 2014 में मुंगेर लोकसभा सीट से लोजपा की वीणा देवी चुनाव जीती थीं।

*ललन सिंह दूसरी दफे बने हैं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष*

ललन सिंह दूसरी बार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए है। जदयू के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े ने इस बात की घोषणा की। ललन सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को नामांकन किया था। रविवार को नामांकन की आखिरी तिथि थी। वहीं, सोमवार को नामांकन वापस लेने की आखिरी तिथि निर्धारित थी। इसके साथ ही रविवार शाम को नामांकन की हुई स्क्रूटनी में ललन सिंह का नामांकन पत्र सही पाया गया था। दोनों डेट लाइन समाप्त होने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी के द्वारा आधिकारिक रुप से इस बात की घोषणा की गयी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी ललन सिंह को ही पसंद कर रहे थे। ऐसे में लगभग नामांकन के पहले से ही, उनकी जीत तय थी।

*अखिलेश सिंह को मिली बिहार कांग्रेस की जिम्मेदारी*

पूर्व केन्द्रीय मंत्री अखिलेश सिंह बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अखिलेश सिंह मदन मोहन झा की जगह लेंगे। अखिलेश राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते रहे हैं। कांग्रेस को दोबारा राजद के करीब लाने में अखिलेश सिंह का काफी अहम रोल रहा था। 2018 में बिहार से राज्यसभा के चुने गए थे। अखिलेश सिंह को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। अखिलेश सिंह भूमिहार जाति से आते हैं। वह 2010 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजद का दामन छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे। उस समय अखिलेश सिंह का एक बयान काफी चर्चा में था। उन्होंने लालू और नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा था कि मैंने कुशासन बाबू लालू प्रसाद और सुशासन बाबू नीतीश कुमार दोनों को देखा। इनलोगों ने उच्च वर्ग की आवाज पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसलिए मैंने राजद को छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया जो जात पंथ से अलग हट कर सभी राजनीतिक नेताओं को सम्मान देती है।

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