*आखिर महागठबंधन में चल क्या रहा है..?*

जनपथ न्यूज डेस्क
रिर्पोट: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
16 सितंबर 2022

भागलपुर : बिहार में आप कहीं भी जाइए एक स्लोगन जरूर सुनाई देगा- बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है… अब बहार कितनी है, ये तो हाल ही में हुए सियासी उठापटक से तय हो गया है। लेकिन इस उठापटक के बीच जो एक चेहरा स्थिर बना रहा वह है ‘नीतीश कुमार’. दरअसल बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ राजद का हाथ थाम लिया है।

एक बार फिर बिहार की जनता को लालू और नीतीश की जोड़ी एक साथ दिखी तो लोगों को उम्मीद थी कि आने वाले वक्त में बिहार की राजनीतिक और सामाजिक तस्वीर भी बदलेगी। मगर राजद का हाथ थामने के कुछ ही दिनों बाद जदयू-राजद गठबंधन में टकराहट की स्थिति बनती दिख रही है।

एक तरफ जहां जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता निखिल मंडल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया तो वहीं दूसरी तरफ जदयू विधायक बीमा भारती ने लेसी सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आइए, समझते हैं पिछले कुछ दिनों में इस महागठबंधन में ऐसा क्या हो रहा है, जिससे ये कयास लगाया जा रहा है कि बिहार की जदयू-राजद में गठबंधन तो हो गया लेकिन एक दूसरे को वे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

*कृषि मंत्री ने इस्तीफा देने की दी धमकी*
13 सितंबर को राजद के मंत्री और बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफा देने की धमकी दे दी। उन्होंने सरकार की पुरानी नीति और अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाए थे। सुधाकर सिंह ने कहा कि राज्य में आम जनता को मक्का खाने के लिए नहीं मिल रहा है, ऐसी जगह पर एथनाॅल बनाने का कोई मतलब नहीं है। हमारी प्राथमिकता संतुलित आहार मुहैया कराने की होनी चाहिए। इससे पहले 12 सितंबर को उन्होंने ही कृषि विभाग के सभी अधिकारियों को चोर कहते हुए कहा था कि कृषि विभाग के सारे अधिकारी चोर हैं तो मैं चोरों का सरदार हूं।

इस बीच मंगलवार यानी 13 सितंबर को हुए बिहार कैबिनेट की बैठक में जबरदस्त हंगामा हुआ। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस्तीफा देने की धमकी दे दी। दरअसल, हाल ही में सुधाकर सिंह के बयानों पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि उनका इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है। जिसका पलटवार करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि ऐसा है तो मैं इस्तीफा दे देता हूं।

*निखिल मंडल ने दिया इस्तीफा*
जदयू और राजद के हाथ मिलाने के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण तो बदले ही लेकिन पार्टियों के अंदर भी बहुत कुछ बदलता दिख रहा है। बीते सोमवार जदयू के प्रवक्ता निखिल मंडल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। निखिल मंडल साल 2016 से पार्टी के प्रवक्ता रहे है। सूत्रों की मानें तो निखिल मंडल को एहसास हो गया था कि साल 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में शायद उनका टिकट कट सकता है। निखिल मंडल ने साल 2020 में मधेपुरा सीट से बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस वक्त उन्हें राजद के प्रत्याशी डॉ. चंद्रशेखर से हार मिली था। अब चंद्रशेखर महागठबंधन में शामिल हो गए हैं। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि साल 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में निखिल मंडल का टिकट कट सकता है।

गौरतलब हो कि बिहार की राजनीति पर हम अक्सर अपनी पैनी नजर रखते रहे हैं। हालांकि, हम इन घटनाक्रमों को कोई खास तवज्जो नहीं देते है क्योंकि राजद और जदयू के बीच लीडरशिप के लेवल पर फिलहाल कोई टकराव नहीं हो रहा है। लेकिन आपको याद होगा किसान आंदोलन के दरमियान जदयू प्रवक्ता निखिल मंडल राजद के खिलाफ मुखर रहे थे। अब महागठबंधन के बाद इन्हें लालू फैमली को डिफेंड करना होगा। ये उनके इस्तीफे का एक कारण हो सकता है। मेरा मानना है कि निखिल मंडल ने इस्तीफे का कारण भले ही निजी बताया है, लेकिन ये एक विशुद्ध राजनीतक कदम भी हो सकता है। भाजपा आइडिंटी पॉलिटिक्स करती है। ऐसे में बीपी मंडल के पोते निखिल मंडल के सहारे भाजपा मंडल पॉलिटिक्स यानि ओबीसी पॉलिटिक्स को एक बार फिर परवान चढ़ाने की कोशिश कर सकती है।

*राजद के पूर्व प्रदेश महासच‍िव आए भाजपा में*
राजद के नेता रहे और विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को मदद करने वाले नेता अजीत यादव ने सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। राजद के पूर्व प्रदेश महासचिव अजीत यादव अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। नवादा जिले से बड़ी संख्या में राजद के कार्यकर्ताओं का भाजपा में शामिल होना लालू और तेजस्वी दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

*जदयू विधायक बीमा भारती का लेसी सिंह पर आरोप*
बिहार की पूर्व मंत्री और जदयू की विधायक बीमा भारती ने राज्य की खाद्य मंत्री लेसी सिंह को हटाने की मांग की है। पूर्णियां के धमदाहा से विधायक रहीं लेसी सिंह के मंत्री बनते ही रुपौली की जदयू विधायक बीमा भारती भड़क गईं और लेसी सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधायक बीमा भारती ने खाद्य मंत्री लेसी सिंह पर वसूली और मर्डर कराने का गंभीर आरोप लगाया है। बिहार में खाद्य मंत्री लेसी सिंह के पति बूटन सिंह की लालू-राबड़ी राज में हत्या हुई थी, जबकि बीमा भारती के पति अवधेश मंडल भी बाहुबली हैं।

ये हाल की कुछ घटनाएं हैं, इस ओर इशारा करती हैं कि जदयू-राजद के शीर्ष नेताओं ने भले ही मिलकर सरकार बना ली हो लेकिन दूसरी पंक्ति के नेता और कार्यकर्ताओं का मन मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।

मेरा मानना है कि जदयू-राजद के नेताओं का नीतीश से टकराव होता रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है जेनरेशन गैप। दरअसल, नीतीश की कैबिनेट के अधिकांश लोग उनकी अगली जेनरेशन के लोग हैं और एक अलग जेनरेशन के साथ कैबिनेट में काम करना आसान नहीं होता, चाहे वह एक जेनरशन आगे के लोग हों या पीछे।

*बिहार में नीतीश सरकार की क्या है स्थिति*
बिहार कि राजनीति पिछले 32 सालों से लालू यादव और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बिहार में नीतीश की राजनीति लालू विरोध पर टिकी रही है। उन्होंने अटल-आडवाणी के जमाने में भाजपा से गठबंधन किया। लेकिन साल 2013 में नरेंद्र मोदी के विरोध में एनडीए से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद 2017 में फिर राजद से नाता तोड़ भाजपा से समझौता कर लिया। अब पांच साल बाद फिर भाजपा का साथ छोड़ राजद के साथ मिलकर सरकार बना ली। राजनीतिक विश्लेषकों कहना है कि नीतीश कुमार के इन फैसलों से उनकी विश्वसनीयता पर सवाल भी उठे हैं।

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