जनपथ न्यूज डेस्क

Reported: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
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9 अक्टूबर 2022

भागलपुर : बिहार में नगर निकाय चुनाव पर पटना हाईकोर्ट के आदेशोपरांत चुनाव के लिए नामांकन किए प्रत्याशियों की बेचैनी बढने के साथ-साथ रातों की नींद उड़ी हुई है। प्रत्याशियों की मेहनत और उनके सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
अब इन प्रत्याशियों को क्या करें क्या न करें… कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। इन प्रत्याशियों को दशहरा पूजा के साथ अब दिपावली व छठ जैसे महापर्व भी फीके पड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ लोग धूमधाम से लक्ष्मी घर दरिद्र बाहर करने वाले पर्व दीपावली को मनाने की तैयारी में जूटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी सामग्रियों पर खर्च-समय व उम्मीद गंवा चुके इन प्रत्याशियों में शोक की लहर स्पष्ट रुप से देखी जा रही है। जो प्रत्याशी सुबह से लेकर रात तक प्रचार-प्रसार के लिए दिन रात एक कर दिए थे, वह हाईकोर्ट के आदेश के बाद मायूस होकर घर में बैठे हुए हैं और यही सोच रहे हैं कि अब इन चुनावी सामग्रियों के साथ उनकी उम्मीदों का क्या होगा… ?

कुछ ऐसा ही हाल भागलपुर नगर निगम में पार्षद समेत मेयर व डिप्टी मेयर पद के लिए नामांकन किए प्रयाशियों की है। भागलपुर नगर निगम में कूल 216 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, जिनमें मेयर पद के लिए 9 व डिप्टी मेयर पद के लिए 10 उम्मीदवार शामिल थे। इन सभी प्रयाशियों के चेहरे पर उदासी देखने को मिल‌ रही हैं। इसकी खास बजह एक यह भी है कि इस बार चुनावी रोस्टर ने शहर के खंभों पर लगे बड़े- बड़े दिग्गज दावेदारों के पोस्टर उतरवा दिये थे लेकिन, हाई कोर्ट पटना के आदेश ने उन दिग्गजों को पुन: सक्रिय कर चुनावी मैदान में ताल ठोंकने का मौका दे दिया है।
चुनाव स्थगित को लेकर हमने मेयर पद के दसों प्रत्याशी को अपनी-अपनी प्रतिकृया देने के लिए कहा, जिनमें निर्वतमान मेयर सीमा साहा ने कहा कि वह न्यायालय के आदेश का सम्मान करती हैं। चुनाव तो आज न कल फिर घोषित हो जाएंगे, इसमें चिंता या फिक्र वाली कोई बात नहीं है। आगे जो कुछ भी होगा,ठीक ही होगा। वहीं खुशूबू कुमारी ने हाई कोर्ट द्वारा चुनाव में रोक लगाने को बड़ा स्पीड ब्रेकर बताया और कहा कि इस ब्रेकर ने हमें सम्भलने और अपनी चाल में सुधार लाने का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि अब वह शहर के हर घर पर दस्तक देकर लोगों और उनकी समस्याओं से रुबरु हो रही हैं। चुनावी तिथि घोषित होते ही जनता के आशीर्वाद से वह पुन: प्रत्याशी के रुप में सामने होंगी। वहीं, भागलपुर से पहली बार भाग्य आजमा रहीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता श्वेता प्रियदर्शनी ने कहा कि उन्हें आम मतदाताओं से फेश टू फेश और उनकी समस्याओं से रुबरु होने का बढ़िया मौका मिला है। उन्हें उम्मीद और भरोसा है कि पुन: चुनावी तिथि घोषित होते ही मतदाताओं के आशीर्वाद से न केवल वह जीत हासिल करेंगी बल्कि प्रगति व उन्नति के लिये अपने मिशन से सबको चौंकाने का काम करेंगी।

इसके बाद अन्य किसी मेयर प्रत्याशी ने जहां अपनी प्रतिक्रिया देने की हिम्मत तक नहीं की.वहीं डिप्टी मेयर की प्रत्याशी नेहा कुमारी खुलकर सामने आई और इसका दोषी राज्य सरकार को बताया।

नेहा कुमारी ने कहा कि वह कोर्ट के आदेश का सम्मान करती हैं, लेकिन राज्य सरकार की गलतियों का खामियाजा आज सारे प्रत्याशियों को भुगतना पड रहा है। उन्होंने बिना जातीय जनगणना के ही चुनाव की घोषणा कर दी। नेहा कुमारी ने कहा कि जब जातीय जनगणना ही नहीं की गई तो आरक्षित सीट कैसे कर दिया गया..? उन्होंने कहा कि सरकार की गलती से आज न केवल सभी प्रत्याशीगण मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए हैं, बल्कि इन प्रत्याशियो से लेकर कार्यकर्ता और वोटर भी मायूस दिख रहे हैं। वोटरो ने लगभग अपने-अपने पसंद के उम्मीदवारों को भी मन ही मन चयन कर लिया था। चुनाव स्थगित होने से वोटर भी मायूस हो गये हैं।
एक और डिप्टी मेयर के प्रत्याशी डाॅ० ओमनाथ भारती ने इस प्रक्रिया की भत्सर्ना करते हुए कहा कि एक तो पहले ही सरकार की ढुल-मूल नीति का खामियाजा नगर निकाय चुनाव के उम्मीदवार भुगत रहे हैं, इसके बाद भी राज्य सरकार अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने से परहेज नहीं कर रही है, यह दुरभाग्य है बिहार का। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने के नाम पर राज्य सरकार क्षेत्र के वार्डों को बद से बदहाली की ओर धकेलना चाहती है.उन्होंने कहा कि बगैर प्रतिनिधि के वार्डों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है और हमारी सरकार आरक्षित-अनारक्षित के खेल में महज इसलिये व्यस्त हैं कि उन्हें यह साबित करना है कि पिछड़े-अतिपिछड़ों के उनसे बड़ा हितैषी कोई नहीं है.डाॅ०भारती ने सरकार से इस खेल को बंद कर क्षेत्र के दुर्गति की ओर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया और कहा कि पिछड़ा-अतिपिछड़ा इन बातों को समझ चुका है कि इस धरा पर उनका हितैषी कोई नहीं है, इसलिये तो वे पिछड़े हैं.उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही पटना हाई कोर्ट ने इस मामले को देख अपना फैंसला सुनाया है, तो भला इसमें अब सुप्रीम कोर्ट क्या करेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे अब खुद के साथ आमजनों को राजनीतिक पेंचों में न फंसाएं और हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए शीघ्र-अतिशीघ्र निकाय चुनाव तिथि की घोषणा कराएं।

वहीं भागलपुर में विकास पुरुष के नाम से चर्चित युवा नेता सह नाथनगर वार्ड सं० 4 के पार्षद प्रतिनिधि पप्पू यादव ने कहा कि भले ही चूक किसी से भी हुई हो पर भुगतना तो प्रत्याशियोंं को ही पड़ा है। उन्होंने करे कोई और भरे कोई की बात को दोहराते हुए कहा कि मेयर-उपमेयर पद में पेंच फंसा हुआ था, तो पार्षद का चुनाव स्थगित क्यों कर दिया गया, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार की मंशा धन-बल पर अंकूश लगाने की होती है, दूसरी तरफ इस तरह खर्च व समय की बर्बादी। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि सरकार के इस दोहरे चरित्र का आखिर क्या अर्थ है और पार्षदों द्वारा किये गए खर्च का खामियाजा आखिर कौन भरेगा, निर्णय इसपर भी होना चाहिए।

बहरहाल राज्य सरकार को भी चाहिए कि अब वे आरक्षित-अनारक्षित की खेल से बाहर आकर उन मतदाताओं और प्रत्याशियों की ओर ध्यानाकृष्ट करें,जो एक साथ टकटकी निगाहों से उनकी ओर देख रहे हैं।

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