जनपथ न्यूज डेस्क

Reported by: गौतम सुमन गर्जना, भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
14 अक्टूबर 2022

भागलपुर/पटना : प्रदेश राजद अध्यक्ष के पद से जगदानंद के लिखित त्याग पत्र को अब तक किसी ने नहीं देखा। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने भी नहीं कहा कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का त्याग पत्र मिल गया है। त्याग पत्र का अनुमान दिल्ली में आयोजित राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल न होने के आधार पर लगाया जा रहा है। घटनाओं को जोड़कर ज्यादा लोग मान रहे हैं कि इतनी नाराजगी के बाद जगदानंद शायद ही वापस लौटें। इसी बहाने राजद में नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई है।

जगदानंद के त्याग पत्र का 30 साल पुराना किस्सा : जगदानंद के त्याग पत्र का 30 साल पुराना किस्सा भी याद किया जा रहा है। 1992 में जगदानंद ने जल संसाधन मंत्री के पद से त्याग पत्र दिया था। उस समय के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने उसे स्वीकार करने के बदले तकिया के नीचे रख दिया था। उन्होंने बाद में इसे अस्वीकार कर दिया। दोनों दृश्य में अंतर यह है कि तब कई नेता लालू प्रसाद और जगदानंद को मनाने में जुटे थे-आप त्याग पत्र स्वीकार नहीं कीजिए, आप काम पर लौट आइए, पंचायत के बाद जगदानंद काम पर लौट आए। लेकिन 30 साल में खास बदलाव यह हुआ है कि इस समय दोनों के बीच पंचायत करने वाले नेता नहीं हैं। राजद का नेतृत्व व्यवहारिक रूप में अगली पीढ़ी के हाथ में आ गया है। पीढ़ियों का संघर्ष सामान्य परिवारों की तरह राजद में भी है।

किस वर्ग के होंगे अध्यक्ष : हां, जगदानंद की नाराजगी पर कोई संदेह नहीं है। वे फिर से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेंगे, इसमें भी संदेह है। ऐसे में उनके विकल्प की तलाश हो रही है। गैर-यादव चेहरे में अल्पसंख्यक,अनुसूचित जाति और राजपूत बिरादरी से तलाश हो रही है, शर्त यह भी कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर बैठने वाले व्यक्ति की पार्टी और परिवार के प्रति प्रतिबद्धता अटूट हो। यह शर्त पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और पूर्व मंत्री श्याम रजक जैसे नेताओं की संभावना को कमजोर करती है, लेकिन राजनीति में इतनी कड़ाई चलती नहीं है। इस वर्ग से दो और नाम हैं: कुमार सर्वजीत और शिवचंद्र राम। सर्वजीत गंभीर और प्रतिबद्ध् हैं। दिक्कत यह है कि उनके पास महत्वपूर्ण और व्यापक जन सरोकार वाला कृषि विभाग है। शिवचंद्र राम पूर्व मंत्री हैं। संगठन से भी जुड़ाव रहा है दो अल्पसंख्यक चेहरे।

राजद वोट के आधार : समीकरण मुस्लिम समुदाय से भी चेहरे हैं, अब्दुल बारी सिद्दीकी और तनवीर हसन, दोनों गंभीर हैं और प्रतिबद्धता भी अटूट रही है और सबसे बड़ी बात यह है कि इन्हे संगठन चलाने का अनुभव है। दोनों सहज और मिलनसार भी हैं, जो किसी संगठन के निर्णायक पदधारी के लिए जरूरी माना जाता है। इस समय मुस्लिम में इन दोनों के अलावा किसी तीसरे चेहरे की चर्चा नहीं है।

अशोक सिंह भी दौड़ में : जगदानंद के विकल्प की खोज राजपूत बिरादरी में भी हो रही है। पूर्व मंत्री अशोक कुमार सिंह की चर्चा है। बता दे कि अशोक कुमार सिंह लंबे समय तक लालू प्रसाद के साथ रहे लेकिन प्रतिबद्धता अटूट नहीं है। कम दिनों के लिए ही सही ये सपा में भी गए थे। इस आधार पर अगर उदय नारायण चौधरी और श्याम रजक जैसों की दावेदारी कमजोर होती है तो अशोक सिंह भी अपवाद नहीं होंगे। पात्र के चयन में यह भी देखा जा रहा है कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ कैसा तालमेल रहेगा।

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