*इलाज के दौरान गिरता है भवन का प्लास्टर*

जनपथ न्यूज़ डेस्क
Reported by: गौतम सुमन गर्जना
Edited by: राकेश कुमार
www.janpathnews.com
1 नवंबर 2022

भागलपुर : अंग प्रदेश का हृदय स्थल सह पूर्वी बिहार के भागलपुर के सबसे बड़े अस्पताल जेएलएनएमसीएच में रोजाना हजारों मरीजों का इलाज किया जाता है, लेकिन अस्पताल के जर्जर हालत पर आजतक किसी ने मरहम तक लगाने की कोशिश नहीं की। ऐसी दशा में यह अस्पताल अपने जर्जर हालात में कभी बड़ी घटना को दावत दे सकता है और एक बड़ी दुर्घटना घटने से यहां कतई इन्कार भी नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब हो कि अंग प्रदेश के इस हृदय स्थल भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में बिहार-झारखंड के करीब 13 जिलों से मरीज अपना इलाज के लिए पहुंचते रहे हैं और यह करीब सैकड़ों कमरे का अस्पताल है। यहां पर सभी विभाग के कार्यालय हैं, जहां डॉक्टर अपनी जान को खतरे में डाल कर इलाज के लिए बैठे रहते हैं। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल का भवन बहुत पुराना और जर्जर है, जिससे मन में कई तरह की बाते आती है फिर भी नौकरी के डर और भय से इलाज करने और डियूटी पर तैनात रहने के लिए विवश हैं।

वहीं इस पर अस्पताल अधीक्षक डॉ० असीम कुमार दास ने बताया कि जर्जर भवन को लेकर पहले भी रिपोर्ट किया जा चुका है। भवन की जर्जर हालत बाहर और अंदर का भी हाल ही में भी रिपोर्ट की गई है। मेंटेनेंस के अभाव में मरीजों को भी दिक्कत होती है। कुछ यहां के विभागीय कारणों से भी काम रुका हुआ है। अब सरकार पर निर्भर करता है कि कब और किस दिन वे इसका मरम्मत करायेंगे। उन्होंने भी अस्पताल की जर्जर हालात को स्वीकार करते हुए बताया कि जगह-जगह, कहीं-कहीं पर पलास्टर भी गिरते रहता है, जिससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

करीब 50 साल पुराना है अस्पताल का भवन : अंग प्रदेश सह पूर्वी बिहार का सबसे यह बड़ा अस्प्ताल लगभग 50 साल पुराना है, लेकिन अफसोस यह है कि इस 50 वर्षीय भवन में कभी 50 रुपये के लागत से भी एक बार इसकी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अंग प्रदेश के भागलपुर पूर्णिया, मधेपुरा, खगड़िया, सहरसा, मुंगेर, बांका, गोड्डा, दुमका साहेबगंज समेत कई जिलों से इलाज के लिए रोजाना 1500 से 2000 मरीज आते हैं।

बहरहाल,अब देखना यह होगा कि सैकड़ों मरीजों का इलाज करने वाले जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इलाज सरकार कब तक कर पाती है। इस अस्पताल पर जरूरत है सरकार की नजरें इनायत की

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