जनपथ न्यूज डेस्क

Repoeted by: गौतम सुमन गर्जना/भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
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26 अक्टूबर 2022

भागलपुर : मत्स्य पुराण में सूर्य ग्रहण को लेकर काफी जानकारी मिलती है। इस पुराण के अनुसार,सूर्य ग्रहण का संबंध समुद्र मंथन में अमृत के निकलने से है। मंथन के बाद जब अमृत बांटा जाने लगा, तब स्वरभानु नाम का असुर अमृत पीने की लालसा में अपना रूप बदलकर सूर्यदेव और चंद्रदेव के मध्य में बैठ गया लेकिन दोनों देवताओं ने असुर को पहचान लिया।

ग्रहण पर रहता है राहु-केतु का प्रभाव : सूर्य और चंद्रदेव ने असुर की शिकायत मोहिनी अवतार में भगवान विष्णु से कर दी। इससे पहले कि असुर अमृत का पूरा पान करता, तब तक भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन ने असुर का गला काट दिया लेकिन,वह तब तक अमर हो चुका था.यही सिर राहु और धड़ केतु ग्रह बना और सूर्य-चंद्रमा से इसी कारण द्वेष रखता है। कथा के अनुसार,उस दिन से जब भी सूर्य और चंद्रमा पास आते हैं, तब राहु-केतु के प्रभाव से ग्रहण लग जाता है।

विदित हो कि भगवान सूर्यदेव के पुत्र कर्ण हैं और कर्ण को ही अंगराज कहा जाता है। वे अंग देश के राजा थे, यह क्षेत्र भागलपुर में है। भागलपुर को कर्ण की धरती और अंग प्रदेश का हृदय स्थल कहा जाता है। कर्ण के क्षेत्र में अपने पिता भगवान सूर्य के ताप को राहु व केतु नहीं झेल सके थे। इस कारण यहां काफी कम समय तक ग्रहण रहा। वर्ष 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण 25 अक्‍टूबर मंगलवार को लगा था। धर्मशास्त्रों में भागलपुर का स्थान विशेष बताया गया है। पूरे देश से सूर्य देव को भागलपुर में ग्रहण लगने में देर हुई और पहले ही इसे मोक्ष मिल गया।

इस बारे में बाबा बूढ़ानाथ मंदिर के पंडित ज्योतिषाचार्य ऋषिकेश पांडेय ने बताया कि बनारस नगरी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग में स्पष्ट लिखा हुआ है कि देश में सूर्य ग्रहण मंगलवार की शाम 4:42 से स्पर्श हुआ और 5:22 सूर्यास्त के साथ मोक्ष हो गया।
भागलपुर शास्त्रों में विशेष स्थान की वजह से यहां सूर्यदेव पर ग्रहण का स्पर्श तीन मिनट देर शाम 4:45 पर हुआ और मोक्ष 5:07 पर ही हो गया। इस तरह भागलपुर में सूर्य देव को ग्रहण 18 मिनट कम ग्रसित किया। उन्होंने कहा कि भागलपुर ऊंचाई पर अवस्थित है, इस कारण सूरज की किरण सबसे पहले भागलपुर पर पड़ती है। कुछ इन्हीं वजहों से ग्रहण का समय यहां कम हुआ। ऐसे भविष्य पुराण में भागलपुर की चर्चा है, जिसे विस्तारित रूप से देखने के बाद ही कम देर ग्रहण लगने का कारण स्पष्ट किया जा सकता है, ऐसे पंचांग में स्पष्ट लिखा हुआ है।

पंडित ज्योतिषाचार्य ऋषिकेश पांडेय ने बताया कि देश के सभी जगहों से भागलपुर में सूर्य ग्रहण 18 मिनट कम समय तक देखा गया। ऋषिकेश पंचांग में स्प्ष्ट भागलपुर के संदर्भ में लिखा गया है।

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