आखिर क्या बजह है,जो ईस्टर्न बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स के सदस्यों पर उठती है ऊंगलियां और इस पर चूप क्यों हैं इनके अध्यक्ष*

जनपथ न्यूज डेस्क/पटना
Reported by: गौतम सुमन गर्जना, भागलपुर
Edited by: राकेश कुमार
25 अगस्त 2022

भागलपुर : आखिर क्या बजह है कि स्थानीय आनंद चिकित्सालय पथ स्थित जिले के व्यवसायिक लोगों के हितार्थ स्थापित संगठन ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स की वर्तमान कार्यसमिति के कुछ सदस्यगण लगातार सरकारी जांच एजेंसियों के घेरे में फंसते जा रहे हैं.कभी स्थानीय पुलिस कर्मियों का गाज उन पर गिरता है तो कभी आयकर विभाग व ईडी ऐसी जांच एजेंशियों की तिरछी नजर उनपर गिरती है। विदित हो कि गुंडा बैंक के आरोपियों पर जब सरकारी शिकंजा कसा तो ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स के कई पदाधिकारी उनक घेरे में आ गए, क्या इसे महज संयोग मात्र कहा जाय या कुछ और। पिछले महीने ही ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ काॅमर्स के आजीवन सदस्य एवं पूर्व कार्यसमिति सदस्य आयकर अधिवक्ता प्रवीणदत्त रूंगटा एवं शहर के चर्चित व्यवसायी कमल चितलांगिया शराब की तस्करी के आरोप में शराब पीकर अधिवक्ता लिखे वाहन में शराब की खेल लाने के जुर्म में न केवल पुलिस के हत्थे चढ़े बल्कि उन्होंने जेल तक की यात्रा की थी और अभी वे जमानत पर बाहर हैं.इससे पहले भी कई सफेदपोस ऐसे हैं,जिनपर उनके गुनाहों के जुर्म में उनपर पुलिसिया गाज गिरी,लेकिन वे आज भी ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स की संचालन समिति के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं।
और अब इनकम टैक्स- सीबीआई और ईडी की छापेमारी में ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स के इन वर्तमान कार्यसमिति में भारी मतों से विजयी हुए वर्तमान अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया के बेहद खासम-खास और नजदीकी माने जाने वाले कार्यसमिति सदस्य जॉनी संथालिया व चेंबर के चुनाव अधिकारी हरिप्रकाश शर्मा व उनके पुत्र राकेश शर्मा तीनों कार्रवाई के घेरे में आए हुए हैं। इन तीनों के आवास पर 48 घंटों से लगातार पुलिस बल के साथ उक्त डिपार्टमेंट छापेमारी का कार्य कर रहे हैं। स्थानीय चुनिहारी टोला स्थित सत्यम अपार्टमेंट 72 घंटों से पुलिस छावनी में तब्दील हुआ पड़ा है, क्या यह संजोग मात्र है या इसमें भी कोई भेद है। इसे लेकर शहर के हर गलियों से लेकर हर चौंक-चौराहों पर इसकी चर्चा होती दिख रही है, मगर ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्रवण बाजोरिया अब भी चूप्पी साधे हुए हैं, जबकि उन्हें इस घटना पर सामने आकर अपना बयान जारी करना चाहिए और व्यापारियों में फैली तरह-तरह की भ्रांतियों को उचित जवाब देकर उसे समाप्त करना चाहिए कि आखिर क्या कारण है,जो लगातार अपनी कुकर्म एवं गैर-जिम्मेदाराना हरकतों से पूर्वी बिहार की सबसे बड़ी व्यवसायिक संगठन होने का दावा करने वाली ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ काॅमर्स की वर्तमान कार्यसमिति के कुछ सदस्यों की काली करतूतों के कारण लगातार यह व्यवसायिक संगठन आरोपित होती रहती है। इस बारे में जब हमने ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री बाजोरिया से संपर्क किया तो उन्होंने स्पष्ट रुप से कहा कि इस तरह की जांच एजेंशी अपने स्तर से सही और गलत की जांच सदैव करती रही है और करती रहेगी। इनमें किसी को भी हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है और ऐसे मामलों में किसी को भी कुछ बोलना या कहना उचित नहीं है।
बहरहाल, इस तरह के मामलों से यह साफ हो चुका है कि दगा किसी का सगा नहीं होता। यदि इन बातों में किसी को कोई संदेह है तो वे एक बार ही सही पर किसी से दगा करके देख लें और जिन्होंने सचमुच किसी के साथ दगा की है वे अपने घर को देख लें, निश्चित रूप से ऐसे लोग उक्त बातों से प्रभावित हो जाएंगे।

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