जनपथ न्यूज़ :- बिहार में पुरानी कहावत है.. जल में माछ, नौ नौ कुटिया बांट। बिहार में महागठबंधन का हाल भी कुछ ऐसा ही है। लोकसभा चुनाव में बुरी हार झेलने के बाद भी महागठबंधन में शामिल घटक दल इस से सीख नहीं ले रहे हैं। चुनाव में हार के 3 महीने बाद महागठबंधन के नेताओं ने विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की लेकिन अब महागठबंधन से सीएम कैंडिडेट कौन होगा इसको लेकर फसाद बढ़ने लगा है।
महागठबंधन की तरफ से सीएम पद की उम्मीदवारी पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने मांझी को नसीहत दी है कि वह अधीर होने की बजाए धैर्य से काम लें। शिवानंद तिवारी ने कहा है कि महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री कौन होगा इसका फैसला विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बाद किया जाएगा। इस मामले को लेकर मीडिया में बयानबाजी से मांझी को बचना चाहिए।
दरअसल महागठबंधन से सीएम पद के उम्मीदवार को लेकर मांझी इसलिए भी पहले फैसला चाहते हैं क्योंकि जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने इस बात का दावा किया था की बहुमत आने पर वह विपक्ष की तरफ से जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।

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