बिहार में बाढ़ का कहर लगातार जारी , सरकार ने अब तक 33 लोगों के मौत की पुष्टि की

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जनपथ न्यूज़ :- बिहार में बाढ़ का कहर लगातार जारी है. बाढ़ त्रासदी में अब तक बिहार के 71 लोगों की मौत हो गई है, जबकि मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. बिहार के 12 जिले में 79 प्रखंडों के 571 पंचायत बाढ़ग्रस्त हैं जबकि 26 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं.

मोतिहारी और सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा मौत
मौत के आंकड़ों की बात करें तो मोतिहारी में बाढ़ से अब तक 19 लोगों की मौत हुई है जबकि सीतामढ़ी में बाढ़ से 11 लोगों की जान गई है. वहीं अररिया में बाढ़ से होने वाली मौत का आंकड़ा अब तक 10 है. पूर्णिया, शिवहर और मधुबनी में बाढ़ से अब तक 7-7 लोगों की जान गई है.

सरकार ने कहा 33 की हुई मौत
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो बिहार सरकार ने अब तक 33 लोगों के मौत की पुष्टि की है. बिहार का पूर्वी चंपारण जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है. इसके अलावा शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सहरसा, कटिहार और पूर्णिया में भी बाढ़ है.

बाढ़ से दरभंगा सीतामढ़ी रेलखंड पर परिचालन ठप
दरभंगा जिला के कमतौल क्षेत्र, बिरौल प्रखंड, बहेरी प्रखंड सहित हनुमाननगर एवं अन्य प्रखंडों मे भी बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। कमतौल थाना क्षेत्र के मिल्की गांव से पूरब और मुरैठा से दक्षिण 18 नंबर रेल पुल के समीप 50 फीट में टूटे खीरोदनी तटबंध कटाव बढ़ रहा है। दर्जनों गांव हुए प्रभावित लोग सुरक्षित स्थान की ओर कर रहे पलायन। मंगलवार की अहले सुबह 3 बजे के करीब 18 नंबर रेल पुल के समीप मुरैठा के तरफ वाली नदी का तटबंध टूट गया जिससे सैकड़ों एकड़ भू-भाग और दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं। हजारों परिवार के लोग विस्थापित हो गए हैं। पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए रेल प्रशासन द्वारा औचक निरीक्षण के बाद रेल यातायात बंद कर दी गई है। रेलवे पुल को पानी छूने के कारण मंगलवार की अहले सुबह से दरभंगा सीतामढ़ी रेलखंड पर परिचालन को बंद कर दिया गया है। सीतामढ़ी और रक्सौल रेल खंड पर पूर्व से परिचालन बंद है। बेलवाड़ा मिल्की और मुरैठा के कुछ भागों का सड़क संपर्क अन्य भागों से टुट गया है। कई जगह पानी के तेज बहाव में पुल बह गया है। प्रशासनिक पदाधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण की जा रही है, किंतु किसी प्रकार का सहयोग व बांध बांधने का उपक्रम नहीं की जा रही है। वही शिवनगर और रजौन के पास कमला नदी का बांध टुटने से अनेकों गांव में पानी घुसने की सूचना भी मिल रही है। क्षेत्र में उत्पन्न हुए बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विधायक जीवेश कुमार ने जिलाधिकारी दरभंगा से बात कर बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक किचन प्लास्टिक पन्नी तथा नाव की समुचित व्यवस्था करने के लिए कहा है। इस संदर्भ में उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी जाले, सहायक उप समाहर्ता दरभंगा तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी सिंहवारा से भी विस्तृत बात कर बाढ़ पीड़ितों को हरसंभव मदद करने का आदेश दिया। इधर मनीगाछी प्रखंड के उजान गांव में बाढ़ के पानी में डूबे दो में से एक कॉलेज छात्र की लाश बरामद होते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गई। बताया जाता है कि 3 छात्र दरभंगा से अपने घर को आ रहे थे। लेकिन घर से कुछ दूरी पहले पानी के तेज बहाव में बह गए। जिसमें 1 छात्र तो बच गया लेकिन 2 छात्र पानी में बह गया। जिसमें एक की लाश मंगलवार को बरामद हुई। सीओ मनीगाछी ने बताया कि दूसरे छात्र की तलाश जारी है। मनीगाछी में बाढ़ मे डूबने से अब तक 2 की मौत हो चुकी है।

अररिया शहर में घुसा बाढ़ का पानी, दहशत
शहर के बीचो-बीच होकर गुजरने वाली सीताधार और सुरसर नदी में अत्यधिक उफान के चलते यहां के कई वाडोर्ं में बाढ़ की हालत भयावह होती जा रही है। हांलाकि रविवार की रात से ही यहां के वार्ड नं.- 1,2,7,8 में बाढ़ ने दस्तक देनी शुरू कर दी थी। सोमवार के संध्या से मंगलवार को समाचार लिखे जाने तक इन वाडोर्ं में बाढ़ का पानी लगातर बढ़ता जा रहा है। हजारों लोग घर-द्वार छोड़ सड़कों, ऊंचे स्थानों एवं नगरपरिषद में अपना डेरा जमाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना हैं कि बाढ़ से पूर्व अगर प्रशासन ने थोड़ी सी भी इसको मद्देनजर रखते हुए हरकत दिखायी होती तो कम-से-कम शहर बाढ़ मुक्त होता। हांलाकि प्रशासन जागी जरूर लेकिन, बाढ़ आने की आहट के बाद। इस दिशा में दो दिनो से फारबिसगंज अनुमंडल अधिकारी रवि प्रकाश खुद मोर्चा संभाले हैं। शहर के मध्य अवस्थित सीताधार से बाढ़ के पानी को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए जेसीबीयों के द्वारा धार में जमे जलकुम्भी व गाद को युद्ध स्तर पर हटवाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस कार्य में कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी भी तत्परता से लगे हैं। समाजसेवी रमेश सिंह, वार्ड पार्षद प्रीतम गुप्ता, रंजन साह, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सोमवार को रात्री शहर में बाढ़ के पानी बढ़ने के मद्देनजर खतरे को भाफते हुए कुछ लोगों के द्वारा फारबिसगंज-रानीगंज मार्ग को हीरो शोरूम के निकट काट दिया गया। जिसके चलते शहर की ओर पानी का रुख तो जरूर कम हुआ लेकिन, लेकिन रानीगंज मार्ग पूरी तरिके से अवरुद्ध है। शहर के हॉस्पीटल रोड के पश्चिम की ओर के वाडोर्ं की हालत बाढ़ के कारण बत्तर होती जा रही है। हजारों लोगों के घर बाढ़ के पानी में डुब चुके हैं। लिहाजा, हजारों की आबादी सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुकी है। बाढ़ प्रभावित वाडोर्ं में मजदुरी करने वाले लोगों की संख्या भी अच्छी-खासी बतायी जा रही है। ऐसे लोगों को सबसे ज्यादा कठिनाईयों के दौर से गुजरना पर रहा है। हांलाकि, शहर में राहत शिविर जरूर चलाए जा रहे हैं। लेकिन, वो नाकाफी है। फारबिसगंज- जोगबनी मार्ग पर भी बाढ़ का पानी 4 फीट तक बह रहा है। इस रोड में मौजूद दर्जनों छोटी- बड़ी दुकानें, गुदामें बाढ़ की चपेट में है। वहीं फारबिसगंज से नरपतगंज, दरभंगा, पटना की ओर जाने वाली मार्ग पर भी बाढ़ ने अपना कब्जा जमा लिया है। जोगबनी रोड अवस्थित गैस गोदाम भी बाद की चपेट में है। अनुमंडल अस्पताल, अनुमंडल न्यायालय, वाणिज्य कार्यालय, डीएसपी कार्यालय में भी बाढ़ का पानी कई फीट तक बह रहा है। शहर का चर्चित प्रेम टॉकीज बाढ़ में जलमग्न है। शायरा नगर की आबादी बाढ ग्रस्त है। शहर का प्रमुख सुभाष चौक व जुम्मन चौक पर सीताधार के उफान के चलते बाढ का पानी निरंतर फैल रहा है। कुल मिलाकर, शहर में बाढ़ का पानी बढ़ने के चलते आम लोग खौफजदा हैं।

मंगलवार का दिन फारबिसगंज के ग्रामीण इलाकों के बाढ़ पीड़ितों के लिए मंगल भरा रहा। प्रखंड के 14 पंचायत के लोग जहां विगत एक सप्ताह से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। वहीं इस दिन सुबह से ही सूर्य देवता के दर्शन मात्र से बाढ़ पीड़ितों की चेहरे खील उठे। हांलाकि सोमवार की रात को हुई बारिश ने एक बार फिर से पीड़ितों की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन, बारिश पर ब्रेक लगने व मौसम का मिजाज बदलने से परि.श्य बदला-बदला सा दिखा। मिली जानकारी के मुताबिक परमान व सिघिया नदियों नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट आयी है। जिसके चलते यहां के लगभग 14 पंचायतों में बाढ़ का पानी अब आहिस्ता-आहिस्ता घटने लगा है। हांलाकि बाढ़ की विभीषिका से उबरने में यहां के लोगों को अभी सभी लगेगा। लेकिन, पानी घटने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। प्रखंड के अमहारा, रमैय, खवासपुर, घोड़ाघाट, बोचाभाग, गुरमी, कामता, बलियाडी, मझुआ, खैरखां, बथनाहा दीपोल, हरिपुर, मटियारी, धमदाहा आदि पंचायतों में मंगलवार को बाढ़ का जलस्तर घटने की सूचना है। हांलाकि, जलस्तर घटने के बाद पीड़ितों को कई होने वाली बीमारियों का खतरा सता रहा है। लोगों का मानना है कि अगर बारिश इसी तरह थमी रही तो जल्द ही बाढ़ पूर्णरूपेण समाप्त हो जाएगी।

रामनगर बिंद टोली में कोसी नदी में भीषण कटाव शुरू
नेपाल से 3 लाख 89 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कोसी नदी के जल स्तर में लगातार वृद्धि जारी है। कोसी नदी के जल स्तर में वृद्धि होने के साथ ही नदी की तेज धारा जगह जगह कटाव करना आरंभ कर दिया है। जल स्तर में वृद्धि होने के साथ ही नवगछिया प्रखंड के सकुचा, रामनगर बिंद टोली, जौनिया आदि इलकों में भीषण कटाव शुरू हो गया है। नदी के कटाव आरंभ होने से प्रखंड स्थित गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। नदी के कटाव शुरू होने से स्थानीय लोगो मे दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने कहा कि कटाव काफी तेज ही रहा है। कटाव की यही स्थिति रही तो हम लोगो का गांव कोसी नदी में विलीन हो जाएगा। तटवर्ती गांव के लोगों ने जल संसाधन विभाग से अविलंब उक्त स्थानों पर कटाव निरोधी कार्य किए जाने की मांग की है। भाकपा माले के जिला कमिटी के सदस्य गौरी शंकर ने कहा की कटाव होने की सूचना जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता महेंद्र साहू को दो दिन पूर्व ही दी गई थी। इसके बाद भी अभीतक बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन कटाव रोकथाम के प्रति उदासीनता का रवैया अपना रहे हैं और कुंभकर्णी निंद्रा में सोए हुए हैं। अविलंब कटाव निरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो इसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन हस्तक्षेप करें और कटाव निरोधी कार्य को अविलंब चालू कराने की गारंटी करें। जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता अनिल कुमार ने कहा कि विभागीय स्तर से स्थल की जांच की जाएगी। कटाव अगर हो रहा है तो बचाव कार्य अविलंब शुरू करवाया जाएगा। उधर इस्माईलपुर प्रखंड के जहान्वी चौक के समीप जहजवा धार को बंद करने के लिए ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया बांध ध्वस्त हो गया है। जहजवा धार को पिछले तीन दिनों में स्थानीय लोगों ने ट्रेक्टर व जेसीबी से मिट्टी डाल कर बांध बनाकर गंगा नदी के पानी को रोक कर रखा था। लेकिन नदी के जल स्तर में वृद्धि होने से नवनिर्मित बांध पानी की अत्यधिक दबाव के कारण ध्वस्त हो गया। जहजवा धार से पानी बहने के साथ ही इस्माईलपुर प्रखंड के दियरा इलाके में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है। बांध के ध्वस्त होने से हजारों एकड़ में लगी किसानों फसल डूबी कर बर्बाद हो गई। जिस गति से नदी का पानी दियारा में फैल रहा है इससे लग रहा है कि पांच दिनों के अंदर इस्माइलपुर प्रखंड पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ जाएगी। जहजवा धार से नदी का पानी इस्माईलपुर दियरा में फैलने के बाद अब लक्ष्मीपुर जमींदारी बांध पर भी अब नदी के पानी का दबाव बढ़ेगा। गंगा नदी के जल स्तर में अगर इसी तरह वृद्धि जारी रहेगी तो नवगछिया अनुमंडल कार्यालय पर भी बाढ़ का खतरा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। नदी के जल स्तर में वृद्धि होने के बाद पिछले तीन दिनों से ग्रामीण स्तर से जहजवा धार के मुंह को बंद करने के लिए बांध का निर्माण किया गया था। इस्माइलपुर के ग्रामीणों के सहयोग से ट्रैक्टर से मिट्टी डाल कर करीब पानी को रोक दिया गया था। लेकिन जल स्तर में वृद्धि होने के बाद पानी लगभग दस फिट हो गई और ग्रामीणों के द्वारा बनाया गया बांध ध्वस्त हो गया। जहजवा धार के मुंह को मिट्टी डाल कर बंद कराए जाने की मांग स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कटाव निरोधी कार्य आरंभ होने से पूर्व से ही किया जा रहा था। इस संबंध में ग्रमीणों ने जल संसाधन विभाग के मंत्री व वरीय अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान भी धार के मुंह हो बांध कराने की मांग की थी। इस संबंध में मंत्री व वरीय अधिकारियों ने धार के मुंह को बंद कराने का आश्वासन भी दिया था। इस्माईलपुर जिला परिसद सदस्य विपिन कुमार मंडल ने कहा कि आरंभ से जल संसाधन विभाग मिट्टी भराई कर जहजवा धार को बंद करने की बात कहते रहे। चार दिन पहले विभाग ने मिट्टी भराई करने के कार्य से अपना पल्ला झाड़ लिया। विभाग के द्वारा पल्ला झाड़ लेने के बाद ग्रामीणों के सहयोग से धार को बंद करने का कार्य शुरू किया गया। लेकिन नदी के जल स्तर में वृद्धि हो जाने के कारण नवनिर्मित मिट्टी पानी के दबाव को सहन नहीं कर पाई और ध्वस्त हो गई। इस्माइलपुर के अंचलाधिकारी सुरेश प्रसाद ने बांध ध्वस्त हो जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व में ही विभाग को धार बांधने का निर्देश दिया गया था। कार्य समय से नहीं हुआ। ग्रामीण स्तर से बांध को बांधने का प्रयास किया जा रहा था जो जल स्तर बढ़ने पर सफल नहीं हुआ और बांध ध्वस्त हो गया।

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