बिहार में शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला, 7 साल से फाइल में प्रेग्नेंट हो जाती थी ये महिला टीचर

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जनपथ न्यूज़:- सुपौल :- बिहार में सुपौल के शिक्षा विभाग की एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. यहां 50 साल की एक महिला टीचर को कुछ अधिकारियों ने पहले कागजों पर न‍ियुक्त किया और फिर उसे एक ऐसे स्कूल में पदस्थ दिखाया गया, जो अस्तित्व में है ही नहीं. यही नहीं, 50 साल की टीचर 7 वर्षों से प्रेग्नेंट बताई गई है और जो मातृत्व अवकाश दिखाकर बाकायदा वेतन ले रही है. जांच में यह सामने आया कि इस शिक्षा विभाग की गड़बड़ी में अधिकारी से लेकर डॉक्टर तक शामिल हैं. ये सभी लोग करीब 7 सालों के दौरान वेतन के रूप में 15 लाख रुपये शिक्षा विभाग से निकलवा चुके हैं. इस मामले में अब डीईओ ने संबंधित बीईओ को के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए शोकॉज नोटिस भेजा है. मामला सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड का है. यहां कई मामलों में विवादित रहे बीईओ सूर्यदेव प्रसाद पर गड़बड़ी करने का आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि बीईओ सूर्यदेव प्रसाद ने मध्य विद्यालय हटबरिया में पदस्थ टीचर कुमारी सुभद्रा ठाकुर को 5 जुलाई 2017 से 16 नवम्बर 2017 तक मातृत्व अवकाश दिया. फिर 17 नवम्बर 2017 से 2 अक्टूबर 2018 तक उन्हें फिर कार्यरत दिखाया और फिर 3 अक्टूबर 2018 से 31 दिसम्बर 2018 तक चिकित्सकीय अवकाश में दिखाने और फिर जनवरी 2019 के कार्यरत अवधि का वेतन भुगतान करने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था. जब इस गड़बड़ी की भनक डीईओ अजय कुमार सिंह को लगी तो उन्होंने मामले की जांच शुरू की. डीईओ ने जब मध्य विद्यालय हटबरिया की जांच की तो अटेंडेंस रजिस्टर में कहीं भी कुमारी सुभद्रा ठाकुर का नाम नहीं था. पूछताछ में पता लगा कि कुमारी सुभद्रा ठाकुर 26 सितम्बर 2012 से स्कूल से बिना सूचना अनुपस्थित हैं. हैरानी की बात तो यह कि कागजातों की जांच में यह सामने आया कि 1 फरवरी 2016 को सुभद्रा ठाकुर को दूबियाही प्राथमिक विद्यालय में ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन सच तो यह है कि इस नाम का कोई स्कूल पिपरा प्रखंड में है ही नहीं. दूबियाही के एक अन्य प्राथमिक स्कूल की टीचर ने बताया कि वह 2005 से स्कूल में हैं और इस स्कूल में सुभद्रा ठाकुर नाम की कोई टीचर कार्यरत ही नहीं है. डीईओ अजय कुमार सिंह के अनुसार, जांच में ग्रामीणों ने बताया कि सुभद्रा ठाकुर नाम की महिला उसी गांव में है. उनको दो बेटे और एक बेटी है. एक बेटे की उम्र लगभग 30 साल है और वह इंजीनियर के पद पर कहीं कार्यरत है. लेकिन वह महिला किसी स्कूल में टीचर नहीं है. डीईओ ने बताया क‍ि मामले की जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद इसमें जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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