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फिर तबाही लाने की तैयारी करने लगी कोसी, सहरसा में बना रही दूसरा रास्ता

अंतरास्ट्रीय

पटना.बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी का जलस्तर मानसून से पहले ही बढ़ने लगा है। सहरसा जिले के पूर्वी कोसी तटबंध के 78.30 किमी के समीप अभी से कोसी नदी का आक्रामक रूप दिखने लगा है। नेपाल में बारिश और कोसी बराज से पानी छोड़े जाने के कारण कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। इस कारण नदी आक्रामक हो गई है। यहां पहाड़पुर के पास नदी ने दूसरा नया रास्ता बना लिया है।

हर साल कोसी में क्यों आती है बाढ़?
बिहार सरकार हर साल बाढ़ की रोकथाम के लिए कोसी के तटबंध की मरम्मत कराती है, लेकिन हर साल इस नदी में बाढ़ आती है, जिससे लाखों लोग बेघर हो जाते हैं। हर साल इस नदी में बाढ़ क्यों आती है यह जानने के लिए आईआईटी कानपुर में अर्थ साइंस के प्रोफेसर राजीव सिन्हा ने अध्ययन किया और अपना रिपोर्ट सबमिट किया है। राजीव सिन्हा ने अपने अध्ययन में पाया कि कोसी में आने वाले बाढ़ की वजह 1082 मिलियन टन सिल्ट है। यह सिल्ट 54 साल में कोसी नदी के तल में जमा हो गया है।

सिल्ट क्यों है बाढ़ के लिए जिम्मेदार?
सिल्ट जमा होने के चलते नदी का तल ऊंचा हो जाता है, जिसके चलते नदी का स्वभाविक सीधा बहाव प्रभावित होता है। तल में जमे गाद के चलते नदी दाएं और बाएं होकर बहने लगती है। ऐसा होने पर नदी अपनी दिशा बदल लेती है और बांध तोड़कर नए रास्ते से बहने लगती है। नदी ऐसा तब करती है जब बारिश से पानी अधिक आ जाए।

1956 के बाद बढ़ी परेशानी

गंगा नदी में जितनी नदियां मिलती हैं उसमें कोसी सबसे अधिक गाद लाती है। 1955-56 में कोसी के दोनों किनारे पर बांध बनाने का काम पूरा हुआ था। पहले भी कोसी में मानसून के साथ बाढ़ आती थी। बांध न होने के चलते बाढ़ का पानी नदी के दोनों किनारे फैल जाता था और इसके साथ ही सिल्ट भी नदी के बाहर जमा हो जाता था। 56 में नदी के दोनों किनारे पर बांध बनने के बाद से गाद नदी की तलहटी में जमा होने लगे, जिससे बांध टूटने लगे और नदी अपना रास्ता बदलने लगी।

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