'काका के ठीहा' : समाज मे खैनी वाला रिश्ता के डोर ना काटी ए नीतीश बाबू

‘काका के ठीहा’ : समाज मे खैनी वाला रिश्ता के डोर ना काटी ए नीतीश बाबू

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रात-बिरात दांत दुखइला पर, दांत से खून आवे पर, पुरान से पुरान खोरला भइला पर खैनी तुरंत के इलाज रहे. 

भोजपुरी के विस्तार, पाठकों को ध्यान में रखते हुए ‘जी डिजिटल’ आपकी प्रिय भाषा में आपके पास पहुंचने की कोशिश कर रहा है. आपके लिए हम ‘काका के ठीहा’ नाम से कॉलम शुरू कर रहे हैं, जिसमें भोजपुरी भाषी क्षेत्र की संस्कृति, समाज, राजनीति, साहित्य, फिल्म पर सामग्री, राय, विचार उपलब्ध कराने जा रहे हैं. आशा है, यह पहल पसंद आएगी. आइए, मिलकर भोजपुरी की मिठास साझा करें : संपादक

जहिया से सुननी ह की ख इनी बंद होखे वाला बा तबहिए से मन बड़ा उदास बा. इ नशा त रहे बाकी कब एतना खतरनाक नशा बन ग इल बुझाइल ना. हाकिम के लागत बा की ख इनी खाइके लोग ब उरा जाले, फाइल बढ़त न इखे, सरकार चलावे मे दिक्कत आवत बा. जवन ख इनी आजू ले माहमूली एगो पत्ता रहे, उ रातो-रात एतना खराब क इसे हो ग इल इहे बात से मन बड़ा उदास बा.

कै गो घर के रोजी रहे इ. पटवन से ले के पतता पकावे आउर ओकरा के सुखावे तक घर सवाग एही मे रात-दिन एक क इले बा. महाजन से लेके दुकानदार तक पहुचला के बादे कटेला. तबहू सरकार बुझत बा की इ कबनो भारी नशा ह, इहे बात त पचत न इखे.

“अस्सी चुटकी नब्बे ताल, देख ले भ इया ख इनी के कमाल” जब बाजेला त मन गद-गद भइल जाला. एकर गुण सुनेब त मन घबरा जाई की इ एगो गरीब के अमीर से जोड़ेला, बुरबक के विद्वान मे मिलावेला. खाली जोड़बे ना करे राउरा शब्द मे दिल से दिल के मिलावेला. बाकी कुछो मांगे मे भरे सरम इज्जत आगे आ जाए लेकिन एक खिल्ली खइनी के खातिर तुरंते आदमी एक दूसरा के सामने हाथ पसार देवेला. सरकार ह ई, राउरा चाहे जबन कही लेकिन इ बात बुझ जाइ की एकरा से सामाजिक दूरी पाटे के काम करेला खैनी.

काहे राउर मिजाज एकरा पर गरम बा बुझात न इखे, लेकिन इहो जान जाई की राउर मुंहबोलवा भाई लालू जी बरा चाव से खालन खैनी. अब भले उनका जेहल ग इला पर जबन र उरा मन करे कर दी.
पटनवा से लौटल ह बिसुनवा त कहत रहे की खैनी हो गइल खाद्य पदार्थ. ए महाराज राउरे तनका बताई की एकरा के कही खाइल जाला का. राउरो इ इंजीनियर के पढ़ाई पढ़ले बानी, राउरो सगे के ढेर सगहतियां खात होई लोग. तनी ओ लोग से सवाच लेम कि खैनी खाइल जाला कि घोटल जाला. त सुन ली एकरा के खाली ओठ के नीचे दबावल जाला. राउर तनका देर बाद फेक दिहल जाला. माटी के चीज माटी मे मिल गईल. अब कबनो आउर बात होखे त बताई जवना से लागे कि राउर बात जाइज बा.

रात-बिरात दांत दुखइला पर, दांत से खून आवे पर, पुरान से पुरान खोरला भइला पर खैनी तुरंत के इलाज रहे. एकरा से मंजन बनेला जबन पाइरिया के इलाज मे काम आवेला. अगर इ अतने खराब नशा रहित त शोले जइसन फिलिमवा मे गब्बरवा काहे खाइल, ओकरा खैनी ठोकला पर कतना सीटी बाजल आउर तबे बसंती नाची. कुल मिलाके खैनी का महातम बहुते पुरान बा, कहे वाला त इहां ले कहे ला कि डा.राजेन्द्र प्रसाद भी खात रहलन. अबहियो से विचार करी ए मुख्यमंत्री जी, इ नशा के पहिला पायदान ह आउर सबसे हल्का नशा. अब त देशी-विदेशी फैक्टरी मे बनत बा पुरिया वाला खैनी. आउर त आउर टिविया पर एकर परचारो आवे लागल बा. एगो गांठ बांध ली कि एकरा खइला से कवनो बेटी-बहू के इज्जत-आबरु पर आंच आइल होखे त बताइ.

फेन से एक बार विचार करी ए मुख्यमंत्री जी. कवनो भारी गलती भइल होखे त माफ करी, लेकिन इ खैनियां के बकस दी. आजो एक रुपया मे दिन भर के खोराक हो जाला, रुपया ना होखे त मंगनियों मे काम चल जाला. अब इ मत बुझेब कि एकर कीमत कवनो घीव से कम बा. इ खाली प्रेम बा की एक दूसरा के सामने हाथ पसरला के साथ ही इज्जत से मिल जाला. समाज मे खैनी वाला रिश्ता के डोर ना काटी ए मुख्यमंत्री जी. एक बार विचार करी ए मुख्यमंत्री जी.

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