पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद मुशर्रफ ने कहा- राजनीति नहीं छोड़ी, सरकार की वजह से नहीं लौटा पाक

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लाहौर. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एपीएमएल) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा जरूर दिया है, लेकिन राजनीति नहीं छोड़ी। मुशर्रफ ने दावा किया कि वे देश लौटकर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उनकी कुछ मांगों को नहीं माना जिसकी वजह से उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा। पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मुशर्रफ के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई है, जिसके बाद उन्होंने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

ख्वाजा आसिफ और नवाज को छूट तो मुझे क्यों नहीं: मुशर्रफ

दुबई में रह रहे मुशर्रफ ने एक वीडियो संदेश में कहा, “मैंने आगामी आम चुनाव लड़ने का फैसला किया था, लेकिन कुछ आश्वासन चाहे थे जैसे गिरफ्तारी से सुरक्षा, आजीवन अयोग्यता के फैसले को पलटना और एग्जिट कंट्रोल सूची से बाहर करना। अगर ख्वाजा आसिफ को ताउम्र अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को पलटा जा सकता है, तो मेरा क्यों नहीं। अगर नवाज शरीफ को देश के अंदर व बाहर घूमने की इजाजत है, तो मुझे क्यों नहीं।”
उन्होंने ये भी कहा, “चूंकि मेरी मांगें नहीं मानी गईं, इसलिए मुझे पता है कि मैं अपनी पार्टी और खुद अपने लिए भी कुछ नहीं कर सकता। इसलिए पार्टी के अन्य नेताओं से संपर्क करने के बाद पाकिस्तान ना लौटने का फैसला किया।”

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था पाकिस्तान लौटने का मौका

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने अपने आदेश में कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ अगला आम चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, उन्हें 13 जून तक देश लौटकर कोर्ट के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। कोर्ट ने वादा किया है कि अगर वे पेश हुए तो उनकी गिरफ्तार भी नहीं होगी। हालांकि, इसके बावजूद मुशर्रफ पाकिस्तान नहीं लौटे और सुप्रीम कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। 2013 में पेशावर हाईकोर्ट ने मुशर्रफ के पाकिस्तान आने पर आजीवन रोक लगा दी थी। मुशर्रफ ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

मुशर्रफ 2014 में राजद्रोह के मामले में दोषी पाए गए थे। इसके बाद से ही उन पर पाक की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है। 2016 में सुनवाई के दौरान ही मुशर्रफ इलाज के लिए दुबई चले गए थे। इसके कुछ महीने बाद ही अदालत ने उन्हें घोषित भगोड़ा करार देते हुए उनकी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दे दिया था।

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